तिरुवनंतपुरम: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जी. माधवन नायर ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती निजी भागीदारी के बीच प्रक्षेपण केंद्रों के प्रबंधन और संचालन को निजी कंपनियों को सौंपने के प्रस्तावों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र इसरो का विकल्प नहीं हो सकता और देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी सरकारी एजेंसी के पास ही रहनी चाहिए।
एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में श्री नायर ने अंतरिक्ष क्षेत्र के अत्यधिक निजीकरण के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि प्रक्षेपण केंद्रों को निजी कंपनियों के हवाले करना उचित कदम नहीं होगा। उनके अनुसार, इसरो के पास दशकों का तकनीकी अनुभव और विशेषज्ञता है, जिसे कमजोर करने के बजाय और मजबूत करने की जरूरत है।
पूर्व इसरो प्रमुख ने कहा कि निजी कंपनियां अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन उन्हें इसरो की मुख्य जिम्मेदारियों का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने निजी तौर पर विकसित रॉकेटों की तुलना इसरो के प्रक्षेपण वाहनों से करने के खिलाफ भी आगाह किया और दोनों के तकनीकी अनुभव तथा क्षमताओं में बड़ा अंतर बताया।
श्री नायर ने इसरो की हालिया प्रक्षेपण विफलताओं को लेकर भी संगठन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जटिल वैज्ञानिक अभियानों में असफलताएं होना असामान्य नहीं है। ऐसी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के बजाय पारदर्शी तरीके से कारणों की समीक्षा और सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने इसरो में रिक्त पदों को भरने और कार्यबल को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विस्तार के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के साथ कुशल मानव संसाधन भी जरूरी हैं।
श्री नायर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों, स्टार्टअप और युवा प्रतिभाओं की बढ़ती भूमिका की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है और देश का अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।







