नयी दिल्ली: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग सीवर और सेप्टिक टैंक से जुड़ी दुर्घटनाओं के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 1223 पीड़ितों के परिजनों सहायता राशि उपलब्ध करवा चुका है। आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि सीवर और सेप्टिक टैंक से जुड़ी दुर्घटनाओं के मामलों को त्वरित संज्ञान लेकर कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है और पीड़ितों को सहायता राशि उपलब्ध करवाने में पूरी संवेदनशीलता से कार्य किये जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि सीवर और सेप्टिक टैंक से जुड़े हादसों में 1993 से 20 अगस्त तक 1394 मौत के मामले संज्ञान में आये हैं, जिनमें से 1223 मामलों में मृतकों के परिजनों को सहायता राशि उपलब्ध करवायी जा चुकी है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुरूप इन मामलों में मृतकों के परिजनों को 30 लाख रुपये उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। श्री गिल ने बताया कि आयोग सफाई कर्मचारियों के बेहतर जीवनयापन के लिए लगातार प्रयासरत है और इन्हें तीन वर्गों में विभाजित करने की मांग कर रहा है। आयोग ने केन्द्रीय श्रम मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि सफाई कर्मचारियों का कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल कर्मी के रूप में वर्गीकरण किया जाये, जिससे उन्हें बेहतर वेतन और अन्य सुविधाएं मिलने में आसानी हो सके। आयोग सफाई कर्मचारियों को जोखिम भत्ता दिलाने के प्रावधान करने का भी मंत्रालय से अनुरोध कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इस बाबत मार्च-अप्रैल से दो पत्र मंत्रालय भेजे जा चुके हैं और मंत्रालय ने इनका संज्ञान लेते हुए इस मामले में कार्यवाही शुरू कर दी है।
उन्होंने बताया कि आयोग सभी राज्य सरकारों से बार-बार अनुरोध कर रहा है कि सफाई कर्मचारियों की प्रत्येक छह माह में चिकित्सा जांच जरूर की जाये। इससे उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समय पर दूर करने में मदद मिलेगी। आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि सफाई निरंतर चलने वाला कार्य हैं अत: वह सफाई कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं। सफाई कर्मचारियों की आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्ति के वह पक्षधर नहीं हैं और इस मामले में संबंधित पक्षों से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारियों को नियमित करने के के लिए भी आयोग गंभीरता से कोशिशें जारी रखे हुए हैं।
श्री गिल ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए नवोदय विद्यालय की तर्ज पर प्रत्येक जिले में आवासीय स्कूल खाेलने के लिए भी आयोग सरकार से पत्राचार कर रहा है। इन कर्मियों को आवास मुहैया कराने के लिए गुजरात सरकार की अंबेडकर आवासीय योजना के अनुरूप पूरे देश में योजनायें बनाने के लिए आयोग राज्य सरकारों से आग्रह कर रहे हैं।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य सरकारों से अपेक्षित सहयोग न मिलने से नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते) विशेष डिजिटल व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रही है। राज्य सरकारें इस पोर्टल पर संबंधित आंकड़े समय पर अपलोड नहीं करवा रही हैं। श्री गिल ने कहा कि 23 अगस्त को आयोग के स्थापना दिवस के मौके पर होने वाले आयोजन में प्रत्येक राज्य से प्रतिनिधि आ रहे हैं, जिसमें सफाई कर्मचारियों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। आयोग का गठन अगस्त 1994 में किया गया था।







