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तीन बेटे, बेटी और पत्नी के रहते बुजुर्ग की अंतिम विदाई में नहीं पहुंचा कोई अपना, ‘बेगानों’ ने किया अंतिम संस्कार

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Despite the presence of three sons, a daughter and a wife, no one from his family reached to bid farewell to the elderly man, the last rites were performed by strangers.

इटावा: उत्तर प्रदेश के इटावा से रिश्तों को झकझोर देने वाली मानवीय संवेदना की कहानी सामने आई है। 70 वर्षीय राजकुमार सक्सेना की मौत के बाद उनके तीन बेटे, बेटी और पत्नी के मौजूद होने के बावजूद अंतिम संस्कार के लिए परिवार का कोई सदस्य आगे नहीं आया। आखिरकार रक्तदाता समूह और पुलिस की मौजूदगी में यमुना घाट पर उनका हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया। राजकुमार सक्सेना मूल रूप से एटा के मारहरा के रहने वाले थे। बताया जाता है कि वह कभी बड़े कारोबारी रहे थे, लेकिन जीवन के अंतिम वर्षों में करीब दो साल तक एटा के एक वृद्धाश्रम में रहे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 16 जुलाई को सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान 12 अगस्त को उनकी मौत हो गई।

मौत के बाद अस्पताल में जब उनका कोई परिजन नहीं पहुंचा तो पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर परिवार से संपर्क करने की कोशिश की। रक्तदाता समूह के संस्थापक शरद तिवारी और उनकी टीम ने भी परिजनों की तलाश शुरू की। दस्तावेजों से राजकुमार के बेटे कुबेर सक्सेना का गाजियाबाद का पता मिला। संपर्क किए जाने पर परिवार के सदस्यों तक सूचना पहुंचाने की कोशिश की गई। परिजनों से संपर्क के प्रयासों के बावजूद शव लेने या अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कोई नहीं पहुंचा। परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों से भी संपर्क करने की कोशिश की गई।

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राजकुमार के भतीजे पंकज सक्सेना के अनुसार, उनके तीन बेटे कुबेर, भारत और धादू गाजियाबाद में रहते हैं। उनकी एक बेटी और पत्नी भी हैं। परिवार से जुड़े कुछ लोगों ने पारिवारिक और संपत्ति विवाद की बातें भी बताईं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी पुलिस चौकी के प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि पुलिस ने दस्तावेजों के आधार पर परिजनों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया था। शव को नियमानुसार 72 घंटे तक शवगृह में रखा गया। अवधि पूरी होने के बाद 15 अगस्त की शाम इटावा में यमुना नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट पर पुलिस और रक्तदाता समूह की मौजूदगी में राजकुमार का अंतिम संस्कार किया गया।

रक्तदाता समूह के सदस्यों ने कहा कि परिवार के मुखिया की अंतिम विदाई के समय भी किसी परिजन का मौजूद न होना बेहद पीड़ादायक है। यह घटना रिश्तों और बुजुर्गों के प्रति पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल खड़े करती है।