डबलिन: ब्रिटेन को आयरलैंड में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के बढ़ते पलायन का सामना करना पड़ रहा है। डेली मेल अखबार ने खुफिया सेवाओं के एक सूत्र के हवाले से बताया कि राष्ट्रवादी संगठन न्यू आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (न्यू आईआरएस) की इन प्रवासियों को आयरलैंड गणराज्य से बाहर निकालने की योजना है, जिसका मकसद आयरलैंड में गैर-कानूनी रूप से रह रहे प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करना है।
अखबार के अनुसार, यह संगठन आयरलैंड में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से हिंसक अभियान चलाने की योजना बना रहा है। अखबार ने कहा कि आशंका है कि न्यू आईआरए का यह अभियान आयरलैंड से ब्रिटेन की ओर प्रवासियों की नई लहर को जन्म दे सकता है, खासकर उत्तरी आयरलैंड के साथ लगी जमीनी सीमा के जरिए।
बताया गया है कि संगठन के समर्थक राजनेताओं को नहीं, बल्कि देश में अवैध रूप से पहुंचने वाले प्रवासियों को चेतावनी जारी करने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों ने अखबार को बताया कि यह समूह इस साल सक्रिय हो गया है और ब्रिटेन का हिस्सा रहे उत्तरी आयरलैंड में पुलिस पर कई हमले कर चुका है।
गौरतलब है कि 1921 में आयरलैंड को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। छोटा सा उत्तरी हिस्सा (अल्स्टर), जहां मुख्य रूप से इंग्लैंड और स्कॉटलैंड से आए प्रवासियों के वंशज रहते थे, ब्रिटेन का हिस्सा बना रहा, जबकि बाकी हिस्सा ब्रिटिश डोमिनियन (ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले वे स्वशासित देश) बन गया।तब से, यूनियनिस्ट (जो ब्रिटेन के समर्थक थे) और रिपब्लिकन (जो आज़ादी के समर्थक थे) के बीच लगभग लगातार हिंसक संघर्ष चलता रहा।
आयरिश रिपब्लिकन आर्मी और उससे अलग होकर बने संगठनों रियल आईआरए और क्षेत्रीय आईआरए ने 1970 और 1980 के दशक में ब्रिटेन में कई आतंकवादी हमले किये, जिनका मकसद अल्स्टर को रिपब्लिक ऑफ़ आयरलैंड में मिलाना था। वर्ष 2012 में वास्तविक आईआरए कई अन्य गुटों के साथ मिलकर ‘न्यू आईआरए ‘ बन गया। वर्ष 1998 में ‘गुड फ्राइडे एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर होने के बाद आईआरए की आतंकवादी और चरमपंथी गतिविधियां कम हो गयीं। इस समझौते से उस बागी इलाके में राजनीतिक समाधान की प्रक्रिया शुरू हुई।







