
अगरतला: त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों और भर्ती से संबंधित विवरण प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार को अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई 11 अगस्त तक मांगी गई जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई, तो वह मामले को गंभीरता से लेगी। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति बिस्वजीत पालित की खंडपीठ ने सरकारी स्कूलों में कर्मचारियों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि अगर 11 अगस्त तक जानकारी नहीं मिलती है, तो अदालत को सख्त रुख अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। पीठ ने कहा, “महाधिवक्ता के अनुरोध पर दो जुलाई को जारी पिछले आदेश में मांगा गया डेटा देने के लिए आखिरी मौके के तौर पर अगर पिछले आदेश के अनुसार डेटा नहीं दिया गया, तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।”
गौरतलब है कि दो जुलाई के आदेश में त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) को निर्देश दिया था कि सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों और शिक्षकों की उपलब्धता से संबंधित स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के जवाब में नया शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करें। न्यायालय ने आठ मई, 2026 तक शिक्षकों के खाली पड़े पदों की जानकारी मांगी, जिसमें यह भी शामिल था कि कितने पद भरे जाने हैं और कितने पहले ही भरे जा चुके हैं।
इसने राज्य से उन दावों पर भी ध्यान देने को कहा कि प्रधानाध्यापक, प्रधानाध्यापिका और स्कूल निरीक्षक के पदों के लिए भर्ती 2018 से रुकी हुई है, जिसके कारण राज्य के 4,668 सरकारी स्कूलों में से लगभग 86 प्रतिशत में प्रधानाध्यापक या प्रधानाध्यापिका नहीं हैं।
पीठ ने उन रिपोर्टों के बारे में भी सफाई मांगी, जिनमें बताया गया था कि भर्ती रुकने के बाद स्कूल निरीक्षक के 118 पद और प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका के 288 पद खत्म कर दिए गए थे। इसके अलावा उच्च न्यायालय ने सरकार को एक और रिपोर्ट पर जवाब देने का निर्देश दिया, जिसमें कहा गया था कि कई सरकारी स्कूल सिर्फ दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।






