
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों का निकटवर्ती विद्यालयों में विलय करेगी तथा रिक्त होने वाले विद्यालयों में पहली बार प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। लखनऊ में जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में पहली बार प्री-प्राइमरी शिक्षा की व्यवस्था शुरू की जा रही है, जिससे बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
श्री सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से पहले नकल विरोधी अध्यादेश लागू किया गया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने उसे समाप्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में धांधली तथा पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र पर होने वाला व्यय भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। राज्यमंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि यह संख्या 1.34 करोड़ से बढ़कर लगभग 1.90 करोड़ हो गई है। साथ ही विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत रह गई है।
श्री सिंह ने कहा कि सरकार ने पाठ्यक्रम में भी सुधार किया है तथा ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं और गुणवत्ता से जुड़े 19 मानकों पर सुधार किया गया है। उनके अनुसार इन मानकों की उपलब्धि 36 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है।






