लखनऊ: केंद्र सरकार के यमुना पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश को जनवरी 2028 तक यमुना की ओर प्रवाहित होने वाले सभी नालों से जुड़े सीवेज शोधन और प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं को पूरा करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने समीक्षा बैठक में राज्यों की प्रगति का आकलन करने के बाद यह निर्देश जारी किए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के साथ दिल्ली और हरियाणा को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय गृह सचिव इस विषय पर लगभग प्रत्येक पखवाड़े संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठकें कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि गाजियाबाद और लोनी को यमुना सफाई अभियान का प्रमुख केंद्र बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के प्रदूषित नाले दिल्ली पहुंचने वाले प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। साथ ही राज्य ने अपनी पुरानी शिकायत भी दोहराई है कि उसे हथिनीकुंड बैराज से यमुना के जल में निर्धारित हिस्सेदारी पूरी नहीं मिल रही है। सूत्रों के अनुसार अब तक यमुना पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत 11 समीक्षा बैठकों में 91 कार्य बिंदु तय किए गए हैं। इनमें से 44 पूरे हो चुके हैं, जबकि 47 पर काम जारी है। हालांकि हरियाणा और उत्तर प्रदेश से दिल्ली में प्रवेश करने वाले प्रदूषण को रोकने से जुड़े 14 कार्य बिंदुओं में अब तक केवल एक ही पूरा हो पाया है।
यद्यपि उत्तर प्रदेश का कोई भी नाला सीधे यमुना में नहीं गिरता, लेकिन गाजियाबाद का एक और लोनी नगर पालिका परिषद के चार नाले दिल्ली के शाहदरा नाले में मिलते हैं। ये नाले शाहदरा नाले के कुल प्रवाह का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं, जो आगे चलकर यमुना में मिल जाता है। इनमें साहिबाबाद, इंद्रपुरी, बंतला, लालबाग और डीएलएफ अंकुर विहार नाले शामिल हैं। एक संयुक्त सर्वेक्षण में पाया गया कि इन पांच प्रमुख नालों में 286 सहायक नालों का पानी आता है, जिनमें 232 घरेलू सीवेज और 54 औद्योगिक अपशिष्ट वहन करते हैं। इनसे प्रतिदिन लगभग 205 मिलियन लीटर अपशिष्ट जल निकलता है, जिसमें अकेले साहिबाबाद नाले का योगदान 101 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। मार्च में लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच में सभी नालों में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से कहीं अधिक पाया गया।
प्रदूषण रोकने के लिए साहिबाबाद नाले पर अमृत 2.0 योजना के तहत 68 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता का सीवेज शोधन संयंत्र तथा सीवर नेटवर्क का निर्माण 546.94 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। डीएलएफ अंकुर विहार नाले को लोनी सीवेज तृतीय चरण परियोजना के तहत जोड़ा जा रहा है, जबकि इंद्रपुरी, बंतला और लालबाग नालों को सादुल्लाबाद में प्रस्तावित 140 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले नए सीवेज शोधन संयंत्र से जोड़ने की योजना है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजी जा चुकी है।
रिपोर्ट में गाजियाबाद में अवैध रूप से प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का भी उल्लेख है। जिला प्रशासन द्वारा गठित संयुक्त कार्यबल ने पिछले चार महीनों में 244 अवैध औद्योगिक इकाइयों को बंद कराया है और उनका विद्युत संपर्क भी विच्छेदित कर दिया गया है।







