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झारखंड में बड़ी कामयाबी, एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को पुलिस-CRPF ने दबोचा

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Major success in Jharkhand, Naxalite Misir Besra, carrying a bounty of Rs 1 crore, arrested by police and CRPF

गिरिडीह: झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा 209 बटालियन ने संयुक्त अभियान में धनबाद-गिरिडीह सीमा क्षेत्र के मनियाडीह जंगल से भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ दो अन्य माओवादी कैडर भी पकड़े गए हैं। यह कार्रवाई खुफिया एजेंसियों से मिली सटीक सूचना के आधार पर देर रात घेराबंदी कर की गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मिसिर बेसरा सारंडा-कोल्हान क्षेत्र से निकलकर धनबाद के रास्ते गिरिडीह की ओर बढ़ रहा था, तभी सुरक्षा बलों ने उसे धर दबोचा।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है। लंबे समय से वह सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिक सूची में शामिल था और उसके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे थे। हाल के महीनों में उसके कई सहयोगियों के आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी के बाद संगठन पहले ही कमजोर पड़ चुका था।

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पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि मिसिर बेसरा भाकपा (माओवादी) का वरिष्ठ नेता और केंद्रीय कमेटी का सदस्य रहा है। वह झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह वर्षों से कई बड़े नक्सली हमलों, पुलिस बलों पर घात लगाकर किए गए हमलों, आईईडी विस्फोट, लेवी वसूली और हथियारबंद गतिविधियों की योजना बनाने में शामिल रहा है। उसके सिर पर विभिन्न राज्यों और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कुल एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। मिसिर बेसरा को झारखंड में सक्रिय माओवादी संगठन का सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक फरार रहने वाला शीर्ष नेता माना जाता रहा है। हाल ही में गिरफ्तार 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर को भी उसका करीबी सहयोगी बताया गया था।


सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार मिसिर बेसरा के खिलाफ करीब 154 आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये मामले झारखंड, ओडिशा सहित कई नक्सल प्रभावित राज्यों में हत्या, पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों पर हमले, विस्फोट, रंगदारी वसूली, आपराधिक षड्यंत्र, गैरकानूनी हथियार रखने और माओवादी गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोपों से संबंधित हैं। वह कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक वांछित नक्सलियों की सूची में शामिल था।

मिसिर बेसरा का आपराधिक इतिहास भी बेहद चर्चित रहा है। वर्ष 2007 में उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर से वह फरार होने में सफल हो गया। इसके बाद वह लगातार सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देता रहा और जंगलों में रहकर संगठन की कमान संभालता रहा। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने उसके खिलाफ लगातार अभियान चलाया और आत्मसमर्पण की अपील भी की थी। पूछताछ से मिल सकती हैं कई अहम जानकारियां सुरक्षा एजेंसियां अब मिसिर बेसरा से पूछताछ कर उसके शेष नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों, वित्तीय स्रोतों और विभिन्न राज्यों में सक्रिय माओवादी मॉड्यूल के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हैं। अधिकारियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से झारखंड में नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है और भविष्य में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।