चेन्नई: जापान की छह इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी कंपनियों ने कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) मंच कॉग्नवी के जरिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास, आईआईटी मंडी और चेन्नई के एक निजी विश्वविद्यालय से 12 इंजीनियरिंग छात्रों को जापान में खास प्रौद्योगिकी भूमिकाओं के लिए चयन किया है। इन छात्रों का चयन पारंपरिक रिज़्यूमे के बजाय उनकी दिखाई गयी तकनीकी दक्षता के आधार पर किया गया है।
एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार सेमीकंडक्टर, ईवी और विनिर्माण जैसे मुख्य क्षेत्रों के लिए प्रमुख क्षेत्रों में कमी पैदा हो रही है, जिससे कंपनियों को अगस्त की शुरुआत में अपनी भर्ती गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। चुने गए छात्रों को डेटा इंजीनियरिंग, सिस्टम इंजीनियरिंग, एप्लीकेशन इंजीनियरिंग, एम्बेडेड सिस्टम, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिज़ाइन इंजीनियरिंग में जगह मिली है। इस समूह को औसतन 42.87 लाख रुपये का सालाना पैकेज मिला है, जबकि सबसे ज़्यादा ऑफर 56.27 लाख रुपये का था।
ये 12 छात्र भारत के अलग-अलग इलाकों से हैं। वे आईआईटी मंडी और चेन्नई के एक निजी विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, एआई और मशीन लर्निंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और उससे जुड़ी स्ट्रीम्स में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। कॉग्नवी इंडिया के महाप्रबंधक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) वरुण मोदगिल ने कहा, “वैश्विक भर्ती धीरे-धीरे काबिलियत-आधारित चुयन की ओर बढ़ रही है। कंपनियां अब इस बात में ज़्यादा दिलचस्पी ले रही हैं कि कोई इंजीनियर असल में क्या बना सकता है, क्या समस्या हल कर सकता है और क्या डिलीवर कर सकता है, न कि सिर्फ़ यह कि उसने कहाँ पढ़ाई की है। भारत में इंजीनियरिंग प्रतिभा का ज़बरदस्त पूल है, और जब कौशल को इंडस्ट्री की ज़रूरतों के हिसाब से मैप किया जाता है, तो मौके बहुत ज़्यादा बढ़ जाते हैं।”
एचआर विशेषग्यों का मानना है कि हाल की भर्तियां वैश्विक दक्षता बाजार में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाती हैं। इसमें कंपनियां चयन को ज़्यादा सटीक बनाने और ज़्यादा प्रतिभा तक पहुँचने के लिए कौशल-आधारित भर्ती का तरीका अपना रही हैं। ” उन्होंने कहा कि कॉग्नावी इंडिया प्रमुख संस्थानों जैसे आईआईटी मद्रास और आईआईटी मंडी के साथ इंटर्नशिप-से-प्री-प्लेसमेंट ऑफर (पीपीओ) कार्यक्रम के ज़रिए उद्योग -अकादमी सहयोग का विस्तार कर रही है। इसका मकसद विश्व स्तर पर नौकरी के योग्य इंजीनियरिंग प्रतिभा की एक बड़ी पाइपलाइन तैयार करना है।







