
जमुहार (रोहतास): गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (GNSU), जमुहार के नारायण स्कूल ऑफ लॉ द्वारा गुरुवार को विश्वविद्यालय के देव मंगल सभागार (ऑडी-3) में “The Journey from Dharma to Law to Indian Ethics and Legal Philosophy” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और विधि विशेषज्ञों ने भारतीय दर्शन, नैतिकता, न्याय व्यवस्था और विधिक मूल्यों पर विस्तार से अपने विचार रखे। कार्यशाला का समन्वयन नारायण स्कूल ऑफ लॉ की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संगीता कुमारी ने किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विधि विभाग के छात्र-छात्राएं एवं विभिन्न संकायों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. संगीता कुमारी ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था केवल कानून की धाराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें भारतीय संस्कृति, धर्म, नैतिकता और मानवीय मूल्यों में निहित हैं। उन्होंने कहा कि एक सफल विधि विशेषज्ञ बनने के लिए छात्रों को केवल कानून की जानकारी ही नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारियों और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समझना होगा। उन्होंने विधि विभाग के विद्यार्थियों से कहा कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सत्य, ईमानदारी और संवेदनशीलता को स्थापित करना भी एक कानून के विद्यार्थी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने छात्रों से भारतीय विधिक परंपरा का गंभीर अध्ययन करने तथा संविधान की मूल भावना को आत्मसात करने का आह्वान किया। प्रो. (डॉ.) जे. श्रीप्रकाश पांडेय ने भारतीय दर्शन की प्रासंगिकता बताई कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) जे. श्रीप्रकाश पांडेय, वरिष्ठ प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने कहा कि भारतीय दर्शन में वर्णित ‘धर्म’ केवल धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि न्याय, कर्तव्य और नैतिक जीवन का आधार है। उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय प्रणाली की कई अवधारणाएं प्राचीन भारतीय चिंतन से प्रेरित रही हैं और आज भी उनकी प्रासंगिकता बनी हुई है। प्रो. (डॉ.) किस्मत कुमार सिंह ने भारतीय नैतिक चिंतन पर रखे विचार प्रो. (डॉ.) किस्मत कुमार सिंह, प्रोफेसर, पीजी दर्शनशास्त्र विभाग, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा ने भारतीय नैतिक दर्शन की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में न्याय और शांति की स्थापना के लिए नैतिक मूल्यों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विधि और नैतिकता एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों का उद्देश्य समाज में संतुलन और न्याय सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम के दौरान विधि विभाग के छात्रों ने भारतीय न्याय व्यवस्था, संविधान, नैतिक मूल्यों और विधिक दर्शन से जुड़े विभिन्न प्रश्न विशेषज्ञों से पूछे। वक्ताओं ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का विस्तार से समाधान किया। कार्यशाला ने छात्रों को भारतीय विधिक परंपरा और नैतिक मूल्यों को गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान किया गया तथा आयोजकों ने सभी वक्ताओं, शिक्षकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुई।






