Home राष्ट्रीय गरियाबंद में आदिवासी विकास विभाग की अनियमितताओं पर प्रशासन सख्त, कार्रवाई तेज

गरियाबंद में आदिवासी विकास विभाग की अनियमितताओं पर प्रशासन सख्त, कार्रवाई तेज

24
0
Administration strict on irregularities of Tribal Development Department in Gariaband, action intensified

गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से कराए गए निर्माण कार्यों और कार्मिक नियुक्तियों में सामने आई अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार स्कूल जतन योजना के तहत जिले में कुल 830 विद्यालयों के निर्माण एवं मरम्मत कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) को सौंपे गए थे, जिन्हें लगभग पूरा कर लिया गया। वहीं आदिवासी विकास विभाग को सौंपे गए 165 कार्यों में 50 से अधिक कार्य अब भी अधूरे हैं। इनमें 24 कार्य ऐसे हैं, जिनके लिए महासमुंद की मेसर्स सुनील कंस्ट्रक्शन, कोरबा के अजय कुमार राठौर तथा जयनारायण यादव की फर्मों को अग्रिम भुगतान किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ। इन एजेंसियों से लगभग 2.88 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है।


विभाग ने छह जुलाई को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं तथा भुगतान नहीं होने की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
जिला पंचायत की शिक्षा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष संजय नेताम ने आरोप लगाया कि स्थानीय ठेकेदारों को दरकिनार कर बाहरी एजेंसियों को मोटे कमीशन के आधार पर कार्य दिए गए, जिसका खामियाजा अब स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। इसी प्रकार जिले के 116 विद्यालयों में शौचालय निर्माण के लिए लगभग एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण एजेंसी के रूप में दुर्ग की कंचन कंस्ट्रक्शन को कार्य सौंपते ही 61 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान कर दिया गया। करीब दस महीने बाद भी केवल 23 शौचालयों का निर्माण पूरा हो सका। इसके बाद अप्रैल में कलेक्टर ने शेष राशि में से 36 लाख रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया, लेकिन अब तक ठेका कंपनी ने भुगतान नहीं किया है।
जिला पंचायत निर्माण समिति के सभापति ने आरोप लगाया कि संबंधित ठेकेदार प्रभावशाली अधिकारियों के करीबी होने के कारण अब तक केवल नोटिस की औपचारिकता निभाई गई, जबकि प्रशासन चाहे तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी कर सकता था।

GNSU Admission Open 2026


एक अन्य मामले में आदिवासी विकास विभाग द्वारा जिले की 79 आश्रम-शालाओं में स्वीकृत पदों से अधिक चपरासियों की नियुक्ति किए जाने का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि कुछ नियुक्तियां मौखिक आदेशों पर की गईं तथा कुछ मामलों में दलालों के माध्यम से पैसे लेकर भर्ती कराने और जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर नियुक्ति देने के आरोप भी लगे। विभाग में जहां केवल 255 पद स्वीकृत थे, वहां कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 513 तक पहुंच गई। शासन से स्वीकृत पदों के अनुरूप ही बजट मिलने के कारण कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर वेतन दिया जाता रहा। बाद में दिसंबर 2025 में अतिरिक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। मार्च 2026 में लंबित वेतन भुगतान के लिए भेजे गए मांग पत्र में 3.84 करोड़ रुपये की मांग की गई है। हाल ही में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया। इस संबंध में


सहायक आयुक्त लोकेश्वर पटेल ने कहा कि “जब तक आबंटन नहीं मिलेगा भुगतान संभव नहीं है.” जिले के कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने मामलों की पुष्टि करते हुए कहा, “हां, कई कार्य अधूरे हैं. उनका भौतिक सत्यापन कराया गया है. संबंधित ठेकेदारों को अंतर की राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं. दूसरे जिलों में आरआरसी प्रकरण दर्ज कर संपत्ति कुर्क कर वसूली की जाएगी.”


जब उनसे पूछा गया कि बिना कलेक्टर की मंजूरी के कार्य आवंटित नहीं होते, फिर जिम्मेदारी किसकी है, तो उन्होंने कहा, “कुछ कार्य मेरे कार्यकाल से पहले के हैं और कुछ मेरे कार्यकाल के दौरान हुए. तात्कालीन सहायक आयुक्त नवीन भगत के चलते ये सभी गड़बड़ियां हुई है. पूरे मामले की जांच कर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है.”
दूरदर्शिता के अभाव संबंधी प्रश्न पर कलेक्टर ने कहा, “अब जो हो गया, सो हो गया. हमारी कोशिश है कि सभी गड़बड़ियों को ठीक किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो.”