Home राष्ट्रीय दो आदिवासी मजदूरों को बंधक बनाकर मारपीट और जातिसूचक प्रताड़ना का आरोप

दो आदिवासी मजदूरों को बंधक बनाकर मारपीट और जातिसूचक प्रताड़ना का आरोप

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Two tribal labourers were held hostage and allegedly assaulted and subjected to caste-based harassment.

जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सन्ना थाना क्षेत्र में दो आदिवासी मजदूरों ने एक कृषि केंद्र के संचालक और उसके दो सहयोगियों पर बंधक बनाकर बेरहमी से मारपीट करने, निर्वस्त्र कर जूतों से पीटने, जातिसूचक गालियां देने और जबरन चोरी कबूल कराने के लिए वीडियो बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ितों ने मामले की लिखित शिकायत पुलिस को सौंपते हुए भारतीय न्याय संहिता तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है।


शिकायत के अनुसार ग्राम सन्ना निवासी विलसन तिर्की और आनंद कुजूर राहुल कृषि केंद्र में मजदूरी करते हैं। उनका आरोप है कि 3 जुलाई की सुबह केंद्र संचालक राहुल केशरी ने उन्हें दुकान पर बुलाकर एक्सपायरी मक्का और धान की चोरी कर बेचने का आरोप लगाया। जब दोनों ने आरोप से इनकार किया तो उन्हें कथित तौर पर एक कमरे में बंद कर दिया गया।
पीड़ितों का आरोप है कि कुछ देर बाद प्रियांशु केशरी (ऋषु) और प्रेमचंद केशरी भी वहां पहुंचे। तीनों ने मिलकर उनके साथ लात-घूंसों और जूतों से मारपीट की। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों मजदूरों को निर्वस्त्र कर जातिसूचक गालियां दी गईं तथा मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर चोरी स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

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शिकायत के अनुसार मारपीट के बाद विलसन तिर्की का मोबाइल फोन और स्कूटी की चाबी छीन ली गई तथा वाहन अपने कब्जे में रख लिया गया। पीड़ितों का कहना है कि घटना में विलसन की आंख और कान में चोटें आई हैं, जबकि आनंद कुजूर के हाथ, पीठ और उंगलियों में गंभीर चोटें लगी हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि कृषि केंद्र संचालक की शिकायत पर पुलिस ने उनके खिलाफ चोरी का मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन उनकी शिकायत पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


इस संबंध में एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने आज बताया कि मजदूरों के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया गया है। वहीं मजदूरों द्वारा लगाए गए मारपीट और जातिसूचक प्रताड़ना के आरोपों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।