एंटरटेनमेंट डेस्क: हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान ने दशकों बाद अपनी ‘बोल्ड’ ऑन-स्क्रीन छवि को लेकर खुलकर बात की है। 1970 और 80 के दशक में ग्लैमरस और लीक से हटकर किरदारों के लिए मशहूर रहीं जीनत का कहना है कि पर्दे पर दिखाई गई उनकी छवि उनकी वास्तविक व्यक्तित्व से बिल्कुल अलग थी। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें लंबे समय तक एक निश्चित छवि में बांधकर रखा, जबकि निजी जीवन में वह उससे काफी अलग थीं।
एक हालिया इंटरव्यू में जीनत अमान ने कहा कि फिल्म निर्माताओं की दिलचस्पी उनके अभिनय या रचनात्मक सुझावों से अधिक उनके लुक और ग्लैमर पर रहती थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में सेट पर ज्यादातर पुरुषों का दबदबा होता था और एक अभिनेत्री होने के बावजूद उनके किरदारों को किस तरह प्रस्तुत किया जाए, इस पर उनकी राय को बहुत महत्व नहीं दिया जाता था।
जीनत ने कहा कि अक्सर उनसे सिर्फ इतना अपेक्षित होता था कि वे गाने करें, नृत्य करें, कुछ संवाद बोलें और ग्लैमरस दृश्यों में नजर आएं। उनके अनुसार, उनकी सोच, अभिनय क्षमता और रचनात्मक योगदान की अपेक्षा उनकी बाहरी छवि पर अधिक ध्यान दिया जाता था। यही वजह रही कि लंबे समय तक लोग उन्हें उनके फिल्मी किरदारों के आधार पर ही पहचानते रहे।
अभिनेत्री ने अपने फैशन सेंस पर भी चर्चा की और बताया कि विदेश से लौटने के बाद वैश्विक फैशन ट्रेंड्स का असर उनके स्टाइल पर पड़ा। उन्होंने कहा कि कॉस्ट्यूम डिज़ाइनरों के साथ मिलकर काम करने के बावजूद कई बार उनके व्यक्तिगत सुझावों को उतनी अहमियत नहीं मिलती थी, जितनी फिल्म निर्माताओं की पसंद को दी जाती थी।
जीनत अमान ने फिल्म इंडस्ट्री में जेंडर पे गैप के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उनका मानना है कि लंबे समय तक आर्थिक फैसले पुरुषों के हाथों में केंद्रित रहने के कारण महिला कलाकारों को समान पारिश्रमिक नहीं मिल पाया। हालांकि उन्होंने माना कि समय के साथ बदलाव जरूर आया है, लेकिन यह बदलाव अब भी धीमी गति से हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में प्रतिभा को लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि काम के आधार पर सम्मान मिलेगा।







