
पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 5 लाख से अधिक शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में एक नई और पारदर्शी टीचर ट्रांसफर पॉलिसी लाने की घोषणा की है। शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि नई नीति में महिला और पुरुष दोनों वर्ग के शिक्षकों की सहूलियत का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और विभाग के कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार इस बार शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया को अधिक आसान और पारदर्शी बनाने जा रही है। महिला शिक्षिकाओं को प्राथमिकता मिलेगी। महिला शिक्षकों को उनके घर के सबसे नजदीक पोस्टिंग दी जाएगी। इसके तहत उन्हें उनके गृह जिले के गृह प्रखंड की गृह पंचायत के बगल वाले गांव के स्कूल में ट्रांसफर का विकल्प मिलेगा। साथ ही पुरुष शिक्षकों को भी राहत मिलेगी। पुरुष शिक्षकों को अब लंबी दूरी तय करने से निजात मिलेगी। उन्हें उनके गृह जिले के अपने गृह प्रखंड के ठीक बगल वाले प्रखंड में ट्रांसफर-पोस्टिंग का मौका दिया जाएगा। दरअसल, पिछली नीतीश सरकार जो तबादला नीति लेकर आई थी, उसमें काफी खामियां देखने को मिली थीं।
हालांकि उस नीति के तहत हजारों शिक्षकों के मनचाहे तबादले किए गए थे, लेकिन इससे एक गंभीर समस्या खड़ी हो गई। स्कूलों में विषयवार शिक्षकों का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। स्थिति यह हो गई कि कई स्कूलों में एक ही विषय के एक से अधिक शिक्षक तैनात हो गए, जबकि कई स्कूलों में पद पूरी तरह खाली रह गए। इससे बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा था। इन्हीं खामियों को देखते हुए सम्राट चौधरी सरकार ने फिलहाल शिक्षकों के ट्रांसफर पर रोक लगा रखी है। अब शिक्षक संघों, विशेषज्ञों और सभी हितधारकों से सुझाव व सलाह लेने के बाद ही नई फुलप्रूफ नीति को धरातल पर उतारा जाएगा।






