गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले में पिछले दिनों सुर्खियों में रहे मूकबधिर संतोष यादव हत्याकांड की जांच में एक ऐसा चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मामले में पुलिस ने आनन-फानन में तीन निर्दोष व्यक्तियों को जेल भेज दिया था, तकनीकी और वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद अब मृतक का सगा भाई ही इस जघन्य हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड निकला है। उल्लेखनीय है कि बीती 3 मई को मीरगंज थाना क्षेत्र के जिगना गांव में मूकबधिर संतोष यादव की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने बिना किसी गहन वैज्ञानिक अनुसंधान के केवल दबाव में आकर मदन कुमार, हरिनंदन यादव और हरिकेश यादव को नामजद आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इस एकतरफा कार्रवाई के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली की चौतरफा आलोचना होने लगी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने विशेष तकनीकी और वैज्ञानिक टीम का गठन कर नए सिरे से जांच के निर्देश दिए। गहन तकनीकी विश्लेषण और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जब मामले की कड़ियां जोड़ी गईं, तो पूरा घटनाक्रम पूरी तरह बदल गया। पुलिस जांच में यह सच सामने आया कि मृतक संतोष यादव और उसके भाई रामकिशोर यादव की पत्नी के बीच अक्सर घरेलू विवाद होता रहता था। इसी रंजिश के कारण रामकिशोर अपने मूकबधिर भाई को रास्ते से हटाना चाहता था। साथ ही उसने पड़ोसियों के साथ चल रहे पुराने जमीन विवाद का फायदा उठाकर उन्हें इस मामले में फंसाने की खौफनाक साजिश रची थी। रामकिशोर यादव ने हत्या को अंजाम देने के लिए बड़का जिगना गांव निवासी अपने पुराने दोस्त राजकिशोर (शूटर) को बुलाया। घटना वाली रात करीब डेढ़ बजे वह राजकिशोर को चुपके से घर लाया, जहां उसने संतोष यादव को गोली मरवा दी।
हत्या के बाद रामकिशोर करीब आधे घंटे तक कमरे में ही इंतजार करता रहा ताकि यह सुनिश्चित कर सके कि उसके भाई की मौत हो चुकी है। इसके बाद उसने खुद डायल 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी, ताकि किसी को उस पर शक न हो। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। एसपी विनय तिवारी के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता रामकिशोर यादव और शूटर राजकिशोर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वहीं दूसरी ओर गलत अनुसंधान करने और बिना साक्ष्यों के तीन निर्दोषों को जेल भेजने के गंभीर आरोप में मीरगंज थानाध्यक्ष दुर्गानंद मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निर्दोष नागरिकों को ससम्मान रिहा कराने के लिए पुलिस अब न्यायालय में विधिवत आवेदन प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए एसपी विनय तिवारी ने जिला पुलिस बल को सख्त हिदायत दी है कि भविष्य में किसी भी आपराधिक घटना में बिना पुख्ता वैज्ञानिक जांच और ठोस साक्ष्यों के केवल नामजदगी या किसी के दबाव में आकर किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी। पुलिस की इस तत्परता से जहां तीन निर्दोष जल्द जेल से बाहर आएंगे, वहीं असली अपराधी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।







