पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एक बार फिर सक्रिय राजनीति में पूरी तरह लौटने की तैयारी में हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी यादव 5 जनवरी को पटना वापस आ सकते हैं। उनकी इस वापसी को बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे पहले 3 जनवरी को पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें हालिया चुनावी हार की समीक्षा और भविष्य की रणनीति पर गहन मंथन किया जाएगा। एक अखबार के अनुसार 3 जनवरी को होने वाली बैठक में यह तय किया जाएगा कि चुनावी नतीजों में मिली हार की जिम्मेदारी किस पर तय की जाए।
इस बैठक में संगठनात्मक स्तर पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं और कुछ नेताओं पर गाज गिरने की भी संभावना जताई जा रही है। पार्टी के अंदरखाने से मिल रही जानकारी के अनुसार, राजद नेतृत्व अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ठोस कार्रवाई के जरिए संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने के मूड में है। अखबार के मुताबिक बैठक अभी संभावित है और इसकी आधिकारिक जानकारी या पुष्टि नहीं है। तेजस्वी यादव पिछले कुछ समय से बिहार से बाहर थे। हालांकि उनके विदेश दौरे पर सत्ताधारी जदयू ने तीखा हमला किया था। उधर तेजस्वी बाहर रहने के बावजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क में थे। चर्चा है कि इसी दौरान हार को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट भी तैयार कराई गई है। अब पटना लौटने के बाद वे सीधे तौर पर संगठन और राजनीतिक गतिविधियों की कमान संभाल सकते हैं।
माना जा रहा है कि उनकी वापसी के साथ ही राजद में सक्रियता बढ़ेगी और विपक्ष की राजनीति को नई धार मिलेगी। 3 जनवरी की बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें संगठनात्मक बदलाव, जिला स्तर के नेताओं की भूमिका और चुनावी रणनीति की कमजोरियों पर खुलकर चर्चा होगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिन नेताओं या पदाधिकारियों पर चुनाव के दौरान निष्क्रियता, गलत रणनीति या गुटबाजी का आरोप है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। कुछ जिलाध्यक्षों और प्रभारियों को हटाने या जिम्मेदारी बदलने जैसे फैसले भी लिए जा सकते हैं। राजद के भीतर यह भी चर्चा है कि तेजस्वी यादव अब पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की योजना पर काम कर रहे हैं। युवाओं और नए चेहरों को आगे लाने, संगठन में अनुशासन लागू करने और जनसरोकार के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने पर जोर दिया जा सकता है। तेजस्वी की पटना वापसी के बाद विपक्षी दलों के खिलाफ रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।







