
सरायकेला-खरसावां। Seraikela Kharsawan जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत गामदेसाई में संथाली भाषा की ओलचिकी लिपि के जनक Pandit Raghunath Murmu की जयंती शनिवार को धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री सह स्थानीय विधायक Champai Soren मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंपाई सोरेन ने प्राथमिक स्तर से संथाली भाषा में पढ़ाई शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में राज्य में आदिवासी और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा की पहल की गई थी, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया ठप पड़ गई। उन्होंने कहा कि ओलचिकी लिपि में प्रारंभिक शिक्षा से भाषा और साहित्य को मजबूती मिलेगी। उन्होंने आदिवासी समाज की पहचान को भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हुए कहा कि वर्तमान समय में इन मूल्यों का संरक्षण बेहद जरूरी है। समाज को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता है, तभी उसकी पहचान सुरक्षित रह सकेगी। चंपाई सोरेन ने यह भी उल्लेख किया कि लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee की सरकार ने संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया था। साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा संसद की कार्यवाही को संथाली भाषा में उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार द्वारा शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पंडित रघुनाथ मुर्मू के सम्मान में 100 रुपये का स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाया।






