पटना: बिहार में बुजुर्ग कलाकारों के लिए मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना आर्थिक संबल का जरिया बन रही है। योजना के तहत पात्र कलाकारों को हर महीने 3,000 रुपये की पेंशन दी जा रही है। कलाकारों का कहना है कि इस सहायता से उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक चिंता से राहत मिल रही है और वे अपनी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भी सक्रिय हो रहे हैं।
ढोलक वादक शंकरकांत मिश्रा को मिला सहारा
योजना के लाभार्थी 61 वर्षीय ढोलक वादक शंकरकांत मिश्रा पिछले दो दशकों से अधिक समय से वादन से जुड़े हैं। उन्होंने बिहार सरकार के सावन महोत्सव सहित कई कला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी है।
शंकरकांत मिश्रा ने बताया कि युवावस्था में काम के सहारे जीवन चलता रहा, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ बुढ़ापे में आमदनी को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी। ऐसे समय में कलाकार पेंशन योजना उनके लिए मददगार साबित हुई। अब वह अपनी मंडली के साथ मंदिरों, होली और अन्य सामाजिक आयोजनों में पहले की तरह उत्साह से वादन कर रहे हैं।
मंजूषा पेंटिंग के कलाकार विजय कुमार शाह भी लाभार्थी
भागलपुर जिले के अबजूगंज निवासी चित्रकार विजय कुमार शाह ने वर्ष 1980 में कलाकेंद्र, भागलपुर से प्रशिक्षण लेकर चित्रकारी की शुरुआत की थी। फाइन आर्ट्स में डिप्लोमा हासिल करने के बाद उन्होंने बिहार की प्रसिद्ध मंजूषा पेंटिंग को अपनी कला का माध्यम बनाया।
विजय कुमार शाह के अनुसार, उन्हें अप्रैल से पेंशन मिल रही है। तीन हजार रुपये की मासिक सहायता को उन्होंने कलाकारों के लिए बड़ी मदद बताया। अब वह स्कूलों और अन्य चित्रकला केंद्रों में बच्चों को नि:शुल्क चित्रकारी सिखाकर अपनी कला का ज्ञान नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।
411 कलाकारों को पेंशन की मंजूरी
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2025 में शुरू हुई मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के तहत अब तक 411 कलाकारों को हर महीने 3,000 रुपये पेंशन देने की स्वीकृति मिल चुकी है।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। कलाकार का बिहार का स्थायी निवासी होना और कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना जरूरी है।
इसके अलावा आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदक किसी सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए और उसका बिहार कलाकार पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण भी अनिवार्य है।
योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद बुजुर्ग कलाकारों को सामाजिक एवं वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ उनकी कला और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद करना है।







