सासाराम/औरंगाबाद। लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ का उगते हुए सूर्य को अर्घ्य के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हो गया। चार दिनों तक चले इस कठिन और पवित्र अनुष्ठान के आज अंतिम दिन सुबह-सुबह लाखों व्रती और श्रद्धालु विभिन्न छठ घाटों पर एकत्र हुए और उगते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। अंतिम दिन उदयीमान सूर्य को अर्घ्य के दौरान घाटों पर भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। व्रतियों ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर सूर्य देव को ठेकुआ, फल और अन्य प्रसाद अर्पित किए।
इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत विधिवत पूरा किया। वही औरंगाबाद के प्रसिद्ध देव सूर्य मंदिर में आस्था का सैलाब देखने को मिला। चैती छठ पर 11 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। छठ पूजा को लेकर औरंगाबाद जिला प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए थे। छठ वत्तियों को असुविधा न हो इसके लिए जिलाधिकारी स्वयं देव सूर्य मंदिर स्थित छठ घाट पर मौजूद रही और विधि व्यवस्था का जायजा लेती दिखाई दी। सड़कों से लेकर घाटों एवं कंट्रोल रूम तक जिलाधिकारी मॉनिटरिंग करते हुए दिखाई दी। इधर औरंगाबाद विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह भी विधि व्यवस्था को लेकर जायजा लेते रहें। विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह छठ व्रतियों के लिए बनाए गए विशेष टेंट का भी जायजा लेते रहें।
आस्था का यह महापर्व भगवान सूर्य के ऐतिहासिक नगरी देव में विशेष महत्व होता है। इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, जहाँ मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में राजा ऐल ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। यहाँ के सूर्यकुंड में स्नान कर छठ पूजा करने से कुष्ठ रोग समेत विभिन्न बीमारियों से मुक्ति मिलती है और व्रती पश्चिम मुखी सूर्य मंदिर में भगवान भास्कर की पूजा कर सुख-समृद्धि पाते हैं। यह भी कहा जाता है कि देवासुर संग्राम के बाद, देवताओं की मां अदिति ने यहां छठी मैया की पूजा की थी, जिसके बाद उन्हें तेजस्वी पुत्र का वरदान मिला था। इसीलिए मान्यता है कि छठ पूजा के दौरान यहां अर्घ्य देने से पुत्र की प्राप्ति होती है। आज देव समेत पूरे राज्य के विभिन्न नदी, तालाबों और कुंडो में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर चैती छठ का समापन किया गए







