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सत्तुआनी आज: सूर्य का मेष राशि में प्रवेश, सत्तू-आम का सेवन कर मनाई जाएगी मेष संक्रांति

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सत्तुआनी आज: सूर्य का मेष राशि में प्रवेश, सत्तू-आम का सेवन कर मनाई जाएगी मेष संक्रांति

पटना,। वैशाख कृष्ण द्वादशी के अवसर पर मंगलवार को सत्तुआनी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन को मेष संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है, जब सूर्यदेव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इस अवसर पर श्रद्धालु सत्तू-आम का सेवन कर पर्व मनाते हैं। वहीं बुधवार 15 अप्रैल को जुड़शीतल का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार इस वर्ष सत्तुआनी पर सूर्य का अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि में संक्रांति का संयोग बन रहा है। साथ ही शतभिषा नक्षत्र, शुक्ल योग, सिद्ध योग और त्रिपुष्कर योग जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं, जो इस दिन को विशेष फलदायी बनाते हैं। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक देवी भागवत पुराण में मेष संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सत्तू और जल से भरे पात्र का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और कष्टों का निवारण होता है। मेष संक्रांति के साथ ही ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। ऐसे में शरीर को ठंडक देने वाले आहार का सेवन करने की परंपरा है। सत्तू और कच्चे आम (टिकोला) की चटनी शरीर को शीतलता प्रदान करती है, इसलिए इस दिन सत्तू खाने का विशेष महत्व है। कई स्थानों पर जौ और चने के सत्तू के साथ आम की चटनी का सेवन किया जाता है। मिथिला परंपरा के अनुसार जुड़शीतल का पर्व 15 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन रात में जल को मिट्टी के घड़े या शंख में रखकर सुबह घर के बड़े-बुजुर्ग परिवार के सदस्यों पर जल का छींटा देते हैं। मान्यता है कि इससे तन, मन और घर-आंगन में शीतलता व पवित्रता आती है। सत्तुआनी और जुड़शीतल दोनों ही पर्व गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य, शीतलता और परंपरा का संदेश देते हैं।

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