आइची-नागोया। भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। उन्होंने फाइनल में चीन की बाओ ज़ियी को कड़े मुकाबले में हराकर एशियाई खेलों का खिताब जीता। इस जीत के साथ लवलीना एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गईं।
28 वर्षीय लवलीना ने मुकाबले की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ की। पहले राउंड में उन्होंने आक्रामक और संतुलित खेल दिखाते हुए जजों के स्कोरकार्ड पर 3-2 की बढ़त हासिल की। चीन की बाओ ज़ियी ने दूसरे राउंड में जोरदार वापसी की और दूरी कम करते हुए अपरकट के जरिए हमले किए। हालांकि, लवलीना ने राउंड के अंतिम हिस्से में अपनी लय हासिल की और मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी। पांच में से चार जजों ने इस राउंड में भी भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में स्कोर दिया।
इसके बाद लवलीना ने पूरे मुकाबले के दौरान संयम और रणनीति का परिचय दिया। उन्होंने चीनी मुक्केबाज के हमलों का प्रभावी ढंग से सामना किया और अपनी बढ़त बनाए रखते हुए स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया।
लवलीना के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले एशियाई खेलों में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए पदक का रंग बदल दिया और भारत को महत्वपूर्ण स्वर्ण पदक दिलाया।
फाइनल से पहले लवलीना ने सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की नतालिया बोगदानोवा को 3-2 के रोमांचक स्प्लिट डिसीजन से हराया था। मुकाबले में शुरुआती चुनौती के बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए फाइनल में जगह बनाई थी।
वहीं, बाओ ज़ियी एशियाई एलीट चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता थीं और 14-0 के अजेय एमेच्योर रिकॉर्ड के साथ फाइनल में उतरी थीं। इसके बावजूद लवलीना ने दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्हें मात दी।
लवलीना की इस उपलब्धि से भारतीय महिला मुक्केबाजी के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। मैरी कॉम 2014 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनी थीं।







