वाशिंगटन: अमेरिका में कथित वीजा धोखाधड़ी के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई के बीच चेन्नई में स्थापित आईटी कंपनी कॉग्निजेंट के विदेशी कर्मचारियों से जुड़े ग्रीन कार्ड आवेदनों पर बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी श्रम विभाग ने कंपनी के स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM आवेदनों पर रोक लगा दी है।
अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी’एस्पोसिटो ने मंगलवार को बताया कि कॉग्निजेंट और क्लाउडेरा के PERM आवेदनों को जांच पूरी होने तक रोका गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कामगारों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह जांच व्हाइट हाउस के फ्रॉड टास्क फोर्स और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर की जा रही है।
PERM प्रक्रिया अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की दिशा में एक अहम शुरुआती चरण है। इसके तहत कंपनियों को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कामगारों के वेतन या कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
ट्रंप प्रशासन ने जुलाई में H-1B और PERM रोजगार वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी को लेकर व्यापक जांच शुरू की थी।
कॉग्निजेंट की स्थापना 1994 में चेन्नई में हुई थी। कंपनी का मौजूदा मुख्यालय अमेरिका के न्यू जर्सी में है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, 30 जून तक कंपनी के लिए 3,510 H-1B याचिकाओं को मंजूरी मिली थी, जबकि 2020 में यह संख्या 9,413 थी।








