नयी दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में नारेबाजी, तख्तियां दिखाने और सुनियोजित तरीके से कार्यवाही बाधित करने को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि संवाद और विचार-विमर्श संसदीय लोकतंत्र की बुनियाद हैं। घरेलू और वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए विभिन्न देशों की संसदों के बीच सहयोग और संवाद को मजबूत करना जरूरी है।
ओम बिरला गुरुवार को नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक के संबंध में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश की संप्रभुता और विशिष्ट व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए संसदीय संवाद के माध्यम से सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। इससे देशों को एक-दूसरे की बेहतर व्यवस्थाओं से सीखने और साझा समस्याओं के समाधान के लिए अपनी सरकारों को सुझाव देने का अवसर मिलता है।
ब्रिक्स बैठक में आतंकवाद पर चर्चा की उम्मीद
लोकसभा अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में सभी सदस्य देशों की सहमति से संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद साझा मुद्दों पर सहमति बनाई जा सकती है। उन्होंने आतंकवाद को गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि सम्मेलन में इस विषय पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है।
बिरला ने बताया कि भारत ने अन्य देशों के साथ संसदीय संबंध मजबूत करने के लिए संसदीय मैत्री समूहों के गठन की पहल को आगे बढ़ाया है। अब तक 64 देशों के साथ ऐसे समूह बनाए जा चुके हैं। उन्होंने रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक और भारत-रूस संसदीय मैत्री समूह की बैठक होने की भी जानकारी दी।
टीएमसी विवाद और सत्रावसान पर भी बोले
तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के दो धड़ों के बीच मान्यता संबंधी विवाद पर बिरला ने कहा कि संबंधित सदस्यों से जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
संसद के सत्रावसान में देरी के सवाल पर उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 85 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी सत्रावसान में लंबी अवधि तक विलंब के उदाहरण रहे हैं।
परिसीमन से जुड़े संभावित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर संसद का सत्रावसान लंबित होने की चर्चा के बीच इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया। बिरला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संसदीय सहयोग और निरंतर संवाद से साझा चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद मिल सकती है।







