Maharashtra government's big decision, extension of tenure of genealogy committees by one year

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण को लेकर जारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल के बीच तालुका स्तर पर गठित मराठा-कुनबी वंशावली मिलान समितियों का कार्यकाल 30 जून 2027 तक बढ़ा दिया है। सरकार ने यह निर्णय लंबित मामलों और पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करने के उद्देश्य से लिया है।

सरकारी आदेश के अनुसार, तहसीलदारों की अध्यक्षता वाली ये समितियां मराठा और कुनबी समुदाय के बीच वंशावली संबंधों की जांच करती हैं। इसके लिए राजस्व रिकॉर्ड, प्रशासनिक दस्तावेज, पुराने न्यायिक अभिलेख और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों की पड़ताल की जाती है। सत्यापन के बाद संबंधित आवेदकों की जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी पात्रता तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

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राज्य सरकार ने कई जिलों में बड़ी संख्या में मामलों के लंबित रहने और दस्तावेजी प्रक्रिया अधूरी होने को समितियों का कार्यकाल बढ़ाने की प्रमुख वजह बताया है। स्थानीय अधिकारियों को लंबित मामलों के जल्द निपटारे और रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने उन जिलों में भी विशेष ध्यान देने को कहा है, जहां पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों से जुड़ी कागजी कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है। अधिकारियों को संबंधित अभिलेख जुटाने और उनकी जांच की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक रूप से गरमाया हुआ है। आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने आंदोलन के नए चरण की घोषणा की है। उनका आंदोलन ऐतिहासिक कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर समुदाय को आरक्षण से जुड़े लाभ दिलाने की मांग पर केंद्रित है।

प्रशासन के पास मौजूद पुराने कुनबी रिकॉर्ड का सत्यापन इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समितियों का कार्यकाल बढ़ने से अब लंबित दावों और दस्तावेजों की जांच के लिए अधिकारियों को अतिरिक्त समय मिलेगा।