वॉशिंगटन। Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच युद्ध विराम की घोषणा करते हुए अपनी विदेश नीति को लेकर कई अहम बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और Iran के संबंध अब सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं और दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना बन रही है। 40 दिनों से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद आई यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपना ‘दोस्त’ बताते हुए कहा कि हाल ही में दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही। इस दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखने पर जोर दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान के साथ समझौता अंतिम रूप लेता है, तो वह हस्ताक्षर के लिए Pakistan जा सकते हैं।
इसके अलावा उन्होंने Israel और Lebanon के बीच युद्धविराम को लेकर अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अब तक 10वां युद्ध रुकवाया है। ट्रंप ने अपनी विदेश नीति को ‘डोनरो सिद्धांत’ से जोड़ते हुए ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर जोर दिया। यह अवधारणा 19वीं सदी के James Monroe के मोनरो सिद्धांत से प्रेरित बताई जा रही है। ईरान को लेकर ट्रंप ने कड़ा रुख भी दिखाया। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है और उसकी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसके लिए कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जाएगी।पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ट्रंप के इन बयानों को अमेरिका की नई रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।







