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ईंट भट्टों पर सख्ती: यूपी में बंधुआ मजदूरी के 216 मामलों पर मानवाधिकार आयोग की सुनवाई

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ईंट भट्टों पर सख्ती: यूपी में बंधुआ मजदूरी के 216 मामलों पर मानवाधिकार आयोग की सुनवाई

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित ईंट भट्टों से सामने आए बंधुआ मजदूरी के मामलों पर National Human Rights Commission (एनएचआरसी) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने एक मैराथन ऑनलाइन सुनवाई के दौरान 216 मामलों पर एक साथ संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आयोग का मानना है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों और संबंधित कानूनों के पालन में भारी लापरवाही बरती गई है। सुनवाई की अध्यक्षता कर रहे एनएचआरसी सदस्य न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने अधिकारियों की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई मामलों में न तो रिकॉर्ड ठीक से रखा गया और न ही मजदूरों को न्यूनतम वेतन दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जिला स्तर पर जिम्मेदारी से काम किया जाता, तो इतने बड़े पैमाने पर मामलों की सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ती। सुनवाई के दौरान आयोग के महासचिव भरत लाल ने भी स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण गरीब मजदूर शोषण के चक्र में फंसे हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे कागजी प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर मजदूरों के पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने पर ध्यान दें। आयोग की फटकार के बाद राज्य सरकार के अधिकारियों ने सभी 216 मामलों की गहन समीक्षा करने का आश्वासन दिया है। राज्य के श्रम आयुक्त ने तीन सप्ताह के भीतर हर मामले की विस्तृत रिपोर्ट (एटीआर) आयोग को सौंपने की बात कही है। साथ ही, बंधुआ मजदूरों की पहचान, मुक्ति और पुनर्वास की प्रक्रिया को तेज करने का भरोसा भी दिया गया है। गौरतलब है कि बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत मजदूरों को मुक्त कराने के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार पर होती है। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि तय समय सीमा में पीड़ित परिवारों को कितना न्याय मिल पाता है।

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