भरतपुर: राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रक्षाबंधन के उल्लास के बाद पारंपरिक लोकपर्व ‘फुलइयां’ धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। पर्व को लेकर खासकर बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिला। घरों में उगाई गई गेहूं की हरी-हरी बालियों को सजाकर बच्चों ने लोक परंपरा को निभाया।
फुलइयां पर्व की तैयारियां रक्षाबंधन से करीब 10 दिन पहले शुरू हो जाती हैं। परिवार मिट्टी से भरी छोटी टोकरी, पात्र या अन्य बर्तन में गेहूं के दाने बोते हैं। इसके बाद रोजाना पानी देकर इन दानों को उगाया जाता है। कुछ ही दिनों में तैयार होने वाली हरी गेहूं की बालियां इस पर्व का प्रमुख हिस्सा होती हैं।
धौलपुर जिले के कई इलाकों में फुलइयां को ‘भुजरिया’ के नाम से भी जाना जाता है। पर्व के दिन बच्चे घर में तैयार की गई गेहूं की हरी बालियां लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों में शामिल होते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा बच्चों को मिट्टी, खेती और लोक संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी मानी जाती है। घर-आंगन में उगी छोटी-छोटी हरी बालियां खुशहाली और हरियाली का प्रतीक बनकर पर्व की रौनक बढ़ाती हैं।
पर्व की परंपरा के अनुसार, उगाई गई गेहूं की बालियों को बाद में जल में प्रवाहित किया जाता है। बदलते समय के बावजूद धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में फुलइयां की यह लोक परंपरा आज भी लोगों को अपनी संस्कृति और कृषि जीवन से जोड़ रही है।







