Subhash Chandra clarified on the NCLT case, saying this about the claims of Rs 22,006 crore and his assets.

नयी दिल्ली: एसेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने अपनी व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) से मंजूर रिजॉल्यूशन प्लान को लेकर उठ रहे सवालों पर अपना पक्ष रखा है। वीडियो संदेश में चंद्रा ने कहा कि वर्ष 2019 में सामने आए वित्तीय संकट के समय एसेल ग्रुप पर करीब 45,000 करोड़ रुपये की देनदारी थी, जिसमें से लगभग 43,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।चंद्रा के मुताबिक, देनदारियों को पूरा करने के लिए उन्होंने और उनके परिवार ने अपनी निजी संपत्तियां बेच दीं। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उनका घर तक बेचना पड़ा और ग्रुप की वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।

22,006 करोड़ रुपये के दावों पर सवाल

NCLT की कार्यवाही में करीब 22,006 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले लगभग 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान वाले रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी मिली है। इस भारी अंतर को लेकर कर्जदाताओं की ओर से सवाल उठाए गए हैं।सुभाष चंद्रा ने कहा कि 22,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा ऐसा नहीं है कि उन्होंने यह रकम व्यक्तिगत रूप से उधार ली थी। उनके अनुसार, यह दावे एसेल ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के कर्ज के लिए उनके द्वारा दी गई पर्सनल गारंटी से संबंधित हैं।

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स्वतंत्र ऑडिट की मांग

चंद्रा ने पूरे वित्तीय विवाद को स्पष्ट करने के लिए इंडिपेंडेंट ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने बैंकिंग सिस्टम, वित्त मंत्रालय और वरिष्ठ बैंक अधिकारियों से ग्रुप के कर्ज, भुगतान और बकाया देनदारियों की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया।उनका कहना है कि ऑडिट के जरिए यह स्पष्ट हो सकेगा कि संकट के समय ग्रुप पर वास्तविक कर्ज कितना था और अब तक कितना भुगतान किया जा चुका है।

कर्जदाताओं की आपत्तियां जारी

NCLT के मंजूर प्लान को लेकर कुछ कर्जदाताओं ने असहमति जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, HDFC बैंक और LIC हाउसिंग फाइनेंस समेत कुछ ऋणदाता फैसले को आगे चुनौती देने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। रिजॉल्यूशन प्लान को कर्जदाताओं के वोटिंग शेयर का पर्याप्त समर्थन मिला, लेकिन कम रिकवरी को लेकर सवाल बने हुए हैं।

45,000 करोड़ की निजी संपत्ति के दावे पर भी दी सफाई

सुभाष चंद्रा ने उन रिपोर्टों को भी गलत बताया जिनमें उनके चरम कारोबारी दौर में निजी संपत्ति करीब 45,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंकड़ों में ग्रुप की कंपनियों की वैल्यू या बाजार पूंजीकरण को उनकी व्यक्तिगत संपत्ति के साथ मिला दिया गया।चंद्रा ने बताया कि उनकी मौजूदा आर्थिक स्थिति पहले के मुकाबले काफी अलग है। उन्होंने कहा कि अब उनके पास सीमित निजी संपत्ति है और कुछ आय किराये के जरिए होती है।

दोबारा कारोबार शुरू करने का भरोसा

आर्थिक संकट के बावजूद चंद्रा ने भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि वह दोबारा कारोबार खड़ा करना चाहते हैं और नए स्टार्टअप तथा कारोबारी उपक्रमों में निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं।उन्होंने अपने शुरुआती कारोबारी सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत छोटी पूंजी से शुरुआत की थी और आगे भी नए सिरे से काम करने का विश्वास रखते हैं। चंद्रा ने लोगों से सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर उनके बारे में प्रसारित दावों पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने की अपील भी की।