नई दिल्ली। राज्यसभा की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद उच्च सदन का पूरा अंकगणित बदल गया है और सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सातों सांसदों के विलय को मंजूरी दे दी है। इसके बाद संसद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन नेताओं को भाजपा सदस्य के रूप में सूचीबद्ध कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, इन सांसदों ने पहले ही सभापति को पत्र लिखकर खुद को भाजपा का हिस्सा मानने की मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी शामिल हैं। इन सभी नेताओं ने पार्टी छोड़ने के पीछे आप पर अपने मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम को आप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी ने इस फैसले के खिलाफ सभापति के समक्ष याचिका दायर कर इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। आप सांसद संजय सिंह ने भी दल-बदल के आधार पर अयोग्यता की मांग उठाई है। वहीं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इस विलय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ये सभी सांसद अनुशासित और मर्यादित रहे हैं तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे। इस बदलाव के बाद राज्यसभा में भाजपा की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है, जबकि आप के सांसदों की संख्या घटकर 3 रह गई है।







