केरल में लंबी दूरी की बसों में सीट बेल्ट लगाने की तैयारी
Preparations underway to introduce seat belts in long-distance buses in Kerala

तिरुवनंतपुरम (केरल)। केरल सरकार राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की लंबी दूरी की बसों में यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सीट बेल्ट लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव के तहत ‘मिनल’ जैसी तेज रफ्तार बस सेवाओं को भी शामिल किया जा सकता है। राज्य के परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि योजना की व्यावहारिकता का आकलन करने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।

मंत्री के अनुसार, लंबी दूरी की बसों में अचानक ब्रेक लगाने के दौरान यात्रियों के घायल होने का खतरा बना रहता है। विशेष रूप से पुश-बैक सीटों पर बैठे यात्रियों के आगे की ओर गिरने और सामने वाली सीट से टकराने की आशंका रहती है। इसी जोखिम को कम करने के उद्देश्य से सीट बेल्ट लगाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।

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सुरक्षा व्यवस्था का होगा आकलन

सी.पी. जॉन ने कहा कि लंबी दूरी की बसों में सीट बेल्ट लगाना कितना व्यावहारिक और प्रभावी होगा, इसका विस्तृत आकलन कराया जाएगा। इसके बाद ही इस संबंध में कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

बस डिपो के रखरखाव पर भी दी सफाई

केएसआरटीसी के बस डिपो के रखरखाव को लेकर मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं पर इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई अनिवार्यता नहीं थोपी गई है। उन्होंने इस संबंध में सामने आ रही खबरों को भ्रामक बताया।

मंत्री ने कहा कि पर्याप्त वित्तीय संसाधन वाले नगर निकाय और अन्य स्थानीय संस्थाएं अपनी इच्छा से डिपो के रखरखाव की जिम्मेदारी उठा सकती हैं। कुछ डिपो में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव में स्थानीय निकाय पहले से सहयोग कर रहे हैं।

‘प्रियदर्शिनी’ बस सेवा पर भी स्थिति स्पष्ट

परिवहन मंत्री ने ‘प्रियदर्शिनी’ बस सेवा को लेकर उठे विवाद पर भी सफाई दी। उन्होंने उन दावों को खारिज किया कि सामान्य बसों को ‘सिटी फास्ट’ सेवा में परिवर्तित कर दिया गया है। उनके मुताबिक, कुछ सिटी फास्ट सेवाओं को प्रियदर्शिनी योजना के तहत संचालित करने के लिए सामान्य सेवाओं के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया है।

जॉन ने कहा कि सरकार प्रियदर्शिनी सेवा का विस्तार करना चाहती है। उन्होंने बताया कि राज्य के बजट में इस योजना के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता का प्रावधान है। साथ ही, सरकार केएसआरटीसी को पहले ही 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध करा चुकी है।