
नयी दिल्ली: Nirmala Sitharaman और M. K. Stalin के बीच धान बोनस को लेकर जारी विवाद ने केंद्र और राज्य के संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है। इस मुद्दे पर सोमवार को प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने तमिलनाडु सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्टालिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और किसानों के नाम पर एक “झूठा नैरेटिव” तैयार कर रहे हैं, जिससे केंद्र और राज्यों के बीच अनावश्यक टकराव की स्थिति पैदा हो रही है।
सीतारमण ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है, जिसके लिए सभी हितधारकों के साथ सकारात्मक और निरंतर संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार और संतुलन बनाए रखने के लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत सहयोग की आवश्यकता होती है। उन्होंने स्टालिन के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि वित्त मंत्रालय ने तमिलनाडु को धान बोनस नीति बंद करने की सलाह दी है।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि भारत की खाद्य सुरक्षा अभी भी कई बाहरी कारकों पर निर्भर है, खासकर दालों और तिलहनों के आयात पर। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करना न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, यदि इन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं और देश की पोषण सुरक्षा भी मजबूत होगी।
सीतारमण ने स्टालिन से केंद्र विरोधी बयानबाजी बंद करने और वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित पत्र पहले ही राज्य सरकार को भेजा जा चुका है और उसे सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं है।






