
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। 2021 के मुकाबले इस बार चुनावी परिदृश्य काफी बदला हुआ नजर आ रहा है। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 213 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई थी। लेकिन 2026 का मुकाबला कहीं अधिक कड़ा और दिलचस्प माना जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में सत्ता विरोधी लहर उभरती दिख रही है। लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण टीएमसी को भ्रष्टाचार के आरोपों और कुछ संवेदनशील मुद्दों पर जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर शहरी और शिक्षित युवाओं के बीच असंतोष बढ़ा है, जो चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है।
दूसरी ओर, भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का कद बढ़ा है और नंदीग्राम की जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ भी उनके साथ है। अब मुकाबला काफी हद तक “दीदी बनाम दादा” के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, ममता बनर्जी अभी भी राज्य की सबसे लोकप्रिय नेता बनी हुई हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, भाजपा इस बार नए मुद्दों के साथ मैदान में उतरी है। मतदाता सूची पुनरीक्षण और घुसपैठ जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया जा रहा है।इसके अलावा, इस बार त्रिकोणीय मुकाबले की भी संभावना है। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और अन्य दलों की सक्रियता मुस्लिम वोट बैंक में बदलाव ला सकती है। कुल मिलाकर, 2026 का चुनाव 2021 की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी और अप्रत्याशित होने के संकेत दे रहा है।






