रायपुर: बंगाल की खाड़ी में बन रहे संभावित चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। मौसम की स्थिति को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। वहीं, किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कृषि विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
कई जिलों में भारी बारिश की संभावना
भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बना दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। इसके प्रभाव से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है।
मौसम की इस स्थिति को देखते हुए किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए पहले से आवश्यक इंतजाम करने की सलाह दी गई है। प्रशासन और कृषि विभाग को संभावित नुकसान कम करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
धान और दलहन की कटाई फिलहाल टालें
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि धान, दलहन और तिलहन की पककर तैयार फसलों की कटाई अगले दो से चार दिनों तक स्थगित रखें। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को जल्द सुरक्षित और ढके हुए स्थानों पर पहुंचाएं।
खेतों में जलभराव रोकने के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है। फसलों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही कीटनाशक और कवकनाशक दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। रबी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे किसान मौसम की स्थिति के अनुसार नवंबर के पहले सप्ताह से बुवाई शुरू करने पर विचार करें।
सब्जियों और फलदार पौधों की सुरक्षा जरूरी
सब्जी एवं फल उत्पादकों को तेज हवा और बारिश से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। करेला और लौकी जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा देने के साथ केले के पौधों और फलदार वृक्षों को भी आवश्यकतानुसार सहारा देना चाहिए। सब्जियों के खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।
पशुपालक भी रहें सतर्क
पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थानों पर रखने, पर्याप्त सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। तेज हवा और बारिश के दौरान पशुओं को पेड़ों के नीचे या खुले स्थानों पर बांधने से बचना चाहिए।
कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों से मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने और वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करने की अपील की है, ताकि फसलों, बागवानी उत्पादन और पशुधन को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।







