चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी करने के मामले में विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक जी.वी. मार्कंडेयन को सोमवार को सशर्त जमानत दे दी। न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरैयन ने गिरफ्तारी को चुनौती देने, रिमांड आदेश निरस्त करने और जमानत देने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राहत प्रदान की। न्यायालय ने शर्त रखी कि विधायक भविष्य में इस प्रकार की टिप्पणी नहीं करने का लिखित आश्वासन देंगे तथा दो सप्ताह तक प्रतिदिन तूतीकोरिन पुलिस थाने में उपस्थित होंगे।
न्यायालय ने कहा कि वर्तमान में तिरुनेलवेली जिले की पालयमकोट्टई जेल में बंद श्री मार्कंडेयन तूतीकोरिन की अदालत में यह लिखित आश्वासन दाखिल करने के बाद औपचारिक रूप से जमानत आदेश प्राप्त कर सकेंगे। विधानसभा का बजट सत्र पांच अगस्त से शुरू होने के मद्देनजर विधायक ने सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए पुलिस थाने में हाजिरी से छूट देने का अनुरोध किया। अदालत ने उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए विधानसभा की कार्यवाही वाले दिनों में पुलिस के समक्ष उपस्थित होने से छूट दे दी।
इससे पहले तूतीकोरिन के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय ने 30 जुलाई को तथा उससे पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया। विलाथिकुलम विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित श्री मार्कंडेयन को 20 जुलाई को तूतीकोरिन जिला अपराध शाखा पुलिस ने कोविलपट्टी में मतदाताओं के आभार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित धमकीपूर्ण टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उनसे जिला पुलिस कार्यालय में 12 घंटे से अधिक पूछताछ की गई थी, जिसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम सुमति ने उन्हें तीन अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।







