नयी दिल्ली: अयोध्या स्थित Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust एक बार फिर चर्चा में है। ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी गई शिकायत के बाद जिला प्रशासन द्वारा मांगी गई विस्तृत वित्तीय जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है। यह मामला ट्रस्ट की आय, खर्च, दान और संपत्ति संबंधी जानकारी में पारदर्शिता की मांग से जुड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की थी। शिकायत में ट्रस्ट के गठन के बाद से प्राप्त दान, बैंक खातों के संचालन, भूमि खरीद-बिक्री, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इसके बाद पीएमओ ने मामला जिला प्रशासन को भेजा, जिसने ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।
हालांकि ट्रस्ट के सचिव ने प्रशासन को दिए जवाब में कहा कि इस मामले की जांच पहले से ही एक विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है। ट्रस्ट का तर्क है कि जांच प्रक्रिया जारी रहने के दौरान अतिरिक्त वित्तीय दस्तावेज साझा करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
उधर, दान राशि के कथित दुरुपयोग और वित्तीय प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में दान की गणना, उसके रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था में कुछ गंभीर कमियों की ओर संकेत किया गया है। जांच एजेंसी ने दान प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ उनके संभावित संबंधों की भी पड़ताल की है।
एसआईटी ने अभी तक किसी भी व्यक्ति या संस्था को क्लीन चिट नहीं दी है। मामले की संवेदनशीलता और दायरे को देखते हुए जांच टीम ने अधिक समय और अतिरिक्त संसाधनों की मांग की है। फिलहाल राज्य सरकार रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और दान प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।







