नई दिल्ली। देशभर में आज से जनगणना का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है, क्योंकि इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। प्रगणक (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर लोगों से कुल 34 प्रश्न पूछेंगे और टैबलेट या मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करेंगे। इस प्रक्रिया में नागरिकों से उनके मकान, परिवार और सुविधाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। शुरुआत में भवन संख्या, मकान की संरचना—जैसे फर्श, दीवार और छत में प्रयुक्त सामग्री—और मकान के उपयोग के बारे में सवाल किए जाएंगे। इसके बाद परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। जनगणना के दौरान यह भी पूछा जाएगा कि मकान स्वामित्व में है या किराए पर, घर में कितने कमरे हैं और परिवार में कितने विवाहित दंपति रहते हैं। साथ ही, पेयजल का स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की सुविधा, रसोई गैस कनेक्शन और खाना पकाने के ईंधन जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी शामिल हैं। डिजिटल जनगणना में परिवार की परिसंपत्तियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर, वाहन जैसी सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा परिवार द्वारा उपयोग किए जाने वाले मुख्य खाद्यान्न के बारे में भी पूछा जाएगा। सरकार के अनुसार, इस बार लोगों को किसी प्रकार के दस्तावेज दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी। नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही डेटा दर्ज किया जाएगा। डिजिटल प्रक्रिया से डेटा संग्रहण में पारदर्शिता, सटीकता और तेजी आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनगणना देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को समझने और भविष्य की नीतियां तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।







