
नयी दिल्ली: देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ के नोएडा स्थित ग्रुप सेंटर में 10 वर्षीय बच्ची के साथ हुई अमानवीय बर्बरता ने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। आरोप है कि सीआरपीएफ के सिपाही तारिक अनवर और उसकी पत्नी रिम्पा खातून ने बच्ची को लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक यातनाएं दीं, जिसके बाद वह गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही है। बच्ची को 15 जनवरी को बिसरख स्थित सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसके शरीर पर गहरे घाव, सूजन और कुपोषण के गंभीर लक्षण पाए। अस्पताल प्रशासन ने उसी दिन पुलिस को सूचना दी, लेकिन एफआईआर 18 जनवरी को दर्ज की गई, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित बच्ची तारिक अनवर की पत्नी की भांजी है और उसे बिना आधिकारिक अनुमति के सीआरपीएफ कैंपस में रखा गया था। आरोप है कि दंपति बच्ची से घरेलू काम कराते थे, समय पर खाना नहीं देते थे और छोटी-छोटी बातों पर बेरहमी से मारपीट करते थे। मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची का हीमोग्लोबिन मात्र 1.9 पाया गया, जो बेहद खतरनाक स्थिति है। उसकी आंखों के नीचे काले धब्बे, पैरों में सूजन और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। हालत बिगड़ने पर उसे सेक्टर-28 स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह वेंटिलेटर पर है।
सीआरपीएफ प्रवक्ता एम. दिनाकरण के मुताबिक घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की गई और प्रारंभिक जांच के बाद कांस्टेबल तारिक अनवर को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने 18 जनवरी को तारिक और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। सीआरपीएफ ने बयान जारी कर कहा है कि आवासीय परिसरों में किसी भी तरह के अनैतिक या आपराधिक कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच में पुलिस को पूरा सहयोग दिया जाएगा।
इस घटना ने सुरक्षा बलों के भीतर निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है और पूरा मामला मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला है।






