
चंडीगढ़: पंजाब में नशे के कारोबार के खिलाफ 100 घंटे के भीतर निर्णायक कार्रवाई करने के ऐलान के बाद भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी (बीआरपी) ने अपने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। पार्टी को आशंका है कि नशे के खिलाफ उसके सख्त रुख के कारण उसके नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है।
बीआरपी के राष्ट्रीय सचिव मनोज चौबे ने इस संबंध में पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पंजाब प्रभारी सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल भूखड़ी कलां सहित अन्य पदाधिकारियों की सुरक्षा की समीक्षा करने की मांग की है। उन्होंने संदिग्ध संचार गतिविधियों की जांच कराने और संभावित खतरे का आकलन करने का भी आग्रह किया है।
पार्टी की ओर से भेजे गए पत्र में 25 अगस्त 2026 की रात चंडीगढ़ स्थित ग्रेवाल के आवास के आसपास व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों से हुई कथित संदिग्ध बातचीत का उल्लेख किया गया है। बीआरपी ने पहले प्राप्त धमकी भरे ई-मेल का भी हवाला देते हुए मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।
इसके साथ ही पार्टी ने लुधियाना के जमालपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 0221 का जिक्र किया है। बीआरपी का कहना है कि संबंधित घटनाओं और उपलब्ध सूचनाओं की जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि पार्टी पदाधिकारियों की सुरक्षा को लेकर कोई वास्तविक खतरा मौजूद है या नहीं।
मनोज चौबे ने पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों से डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड तथा अन्य उपलब्ध जानकारियों की विस्तृत जांच करने का आग्रह किया है। पार्टी ने कहा है कि जांच के आधार पर खतरे का आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर नेताओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
बीआरपी ने नशे के कारोबार के खिलाफ अपने रुख को दोहराते हुए पदाधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। हालांकि, पार्टी की ओर से जताई गई आशंकाओं और संदिग्ध संचार से जुड़े दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब इस मामले में पुलिस की जांच और सुरक्षा समीक्षा पर नजर रहेगी।






