मुंबई: महाराष्ट्र वक्फ अधिकरण ने मुंबई के ऐतिहासिक खिलाफत हाउस में निर्माण और नवीनीकरण कार्यों पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई 22 अक्टूबर तक स्थगित कर दी है। यह याचिका ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पूर्व विधायक वारिस पठान ने दायर की है। मामले में ऑल इंडिया खिलाफत कमेटी ने संपत्ति पर वक्फ के स्वामित्व के दावे को चुनौती दी है।
न्यायाधीश वाईएमएच खरादी और सदस्य मोहम्मद मोहिउद्दीन मोईद की पीठ के समक्ष मंगलवार को वारिस पठान के अधिवक्ता निसार अहमद खान ने याचिका के समर्थन में अपनी दलीलें पूरी कीं। उन्होंने दावा किया कि खिलाफत हाउस वक्फ की संपत्ति है और परिसर में संचालित बीएड कॉलेज की वैधता पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, कॉलेज को चैरिटी आयुक्त से आवश्यक मंजूरी मिलने को लेकर संदेह है।
वहीं, ऑल इंडिया खिलाफत कमेटी के ट्रस्टी रऊफ पठान ने इन आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संबंधित संपत्ति वक्फ की नहीं है और कमेटी अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 में स्थापित ऑल इंडिया खिलाफत कमेटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध है। उनके मुताबिक, इस संस्थान से करीब 3,600 शिक्षक प्रशिक्षित होकर भारत और विदेशों में सेवाएं दे रहे हैं।
रऊफ पठान ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2003 में संपत्ति को वक्फ के रूप में पंजीकृत किए जाने की जानकारी कमेटी को नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में हुए सर्वेक्षण और सैटेलाइट मैपिंग में भी संपत्ति का उल्लेख नहीं था। कमेटी ने इस मामले में कलेक्टर को पक्षकार बनाने, कथित साजिश की जांच कराने और पिछले पांच वर्षों में चैरिटी आयुक्त को लौटाए गए मूल वक्फ दस्तावेजों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने 13 नवंबर 2003 की वक्फ गजट अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें संपत्ति को धार्मिक संस्थानों की श्रेणी में शामिल किए जाने की बात कही गई है। उन्होंने करीब 150 वर्ष पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड, संपत्ति कार्ड और पूर्व सरकारी दावों से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख किया।
अब अधिकरण में अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी। मामले में संपत्ति के स्वामित्व और निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की मांग को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण रहेंगी।







