नई दिल्ली। संसद के विस्तारित सत्र में केंद्र सरकार लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में बड़े बदलाव की दिशा में अहम कदम उठाने जा रही है। गुरुवार से शुरू हो रहे इस सत्र में सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के साथ परिसीमन और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पेश करेगी। इन प्रस्तावों का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाना तथा महिला आरक्षण को लागू करना है सरकार का कहना है कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए नए परिसीमन की आवश्यकता है। प्रस्ताव के तहत सभी राज्यों में सीटों की संख्या में समान रूप से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी की योजना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा और उनकी सीटों में कटौती नहीं होगी। हालांकि, दक्षिण भारतीय राज्यों में इस प्रस्ताव को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं। उनका मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद नए परिसीमन से उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। सरकार ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए भरोसा दिलाया है कि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल परिसीमन के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रस्ताव राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर विपक्ष खुलकर विरोध की स्थिति में नहीं दिख रहा है। संसद में 16 अप्रैल को इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा के लिए 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। 17 अप्रैल को लोकसभा में मतदान कराया जाएगा, जबकि 18 अप्रैल को इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां करीब 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा।इस तरह, संसद का यह सत्र देश की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत दे रहा है, जहां प्रतिनिधित्व और सत्ता संतुलन के नए समीकरण तय हो सकते हैं।







