A three-hour meeting between farmers and the Centre discussed 10-point demands, including the MSP guarantee law.

गुरुग्राम: संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को गुरुग्राम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक की। बैठक पहले चार सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन केंद्रीय मंत्री के आग्रह पर इसे एक दिन पहले तीन सितंबर को आयोजित किया गया।

बैठक के दौरान किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए किसानों और मजदूरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के समाधान की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान नेता शामिल रहे।

GNSU Admission Open 2026

किसानों ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर अपनी चिंताएं भी केंद्रीय मंत्री के सामने रखीं। मोर्चे ने कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मछली पालन क्षेत्रों को व्यापार समझौते के दायरे से बाहर रखने की मांग की। किसान नेताओं के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने इन क्षेत्रों के हितों की रक्षा का आश्वासन देते हुए कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही इस संबंध में अपना रुख सार्वजनिक करेगी।

बैठक में हाईटेंशन बिजली लाइनों के लिए मुआवजे का मुद्दा भी उठाया गया। किसान नेताओं के अनुसार, मंत्री ने मौजूदा नीति में कमियां स्वीकार करते हुए उन्हें दूर कर बेहतर नीति बनाने की बात कही। जमीन की बाजार कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लाइनों के ‘राइट ऑफ वे’ के लिए बाजार मूल्य का 60 प्रतिशत मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया गया।

किसानों ने सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप सी2 लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर एमएसपी तय करने और किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी की मांग दोहराई। इसके साथ ही 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों को दोबारा लागू करने की मांग भी रखी गई।

गन्ने से जुड़े मुद्दों पर मोर्चे ने एफआरपी बढ़ाकर कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने और किसानों को 14 दिनों के भीतर गन्ने का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान की भरपाई के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने तथा फसल बीमा योजना में किसान हितैषी बदलाव की मांग भी सामने रखी गई।

बिजली संशोधन विधेयक को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कथित तौर पर आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के बिजली संबंधी फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और खेती-किसानी से संबंधित बदलाव करने का कोई एजेंडा केंद्र के पास नहीं है। किसान नेताओं ने आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी, जिस पर संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन मिलने की बात कही गई।

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने कहा कि किसानों और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर उसका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। यह बैठक 16 अगस्त को 51 किसानों की ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ को रोके जाने के बाद केंद्र और किसान संगठनों के बीच बातचीत की प्रक्रिया का हिस्सा रही।