A cultural evening adorned with Rajasthani folk dances

श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय कला मंदिर के तत्वावधान में चौधरी रामजस सहारण सदन में आयोजित राजस्थानी सांस्कृतिक संध्या ने शहर के कला प्रेमियों को राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं से रूबरू कराया। करीब दो घंटे चले कार्यक्रम में बाड़मेर के प्रसिद्ध लोक कलाकार प्रेम मंडा और सोनू राजस्थानी ने विभिन्न पारंपरिक नृत्य शैलियों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत कलाकारों के मंच पर पहुंचने के साथ हुई। दोनों कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों में राजस्थानी लोक संस्कृति, परंपरा और कला कौशल का प्रदर्शन किया। भवाई नृत्य के दौरान सिर पर गैस सिलेंडर और सात मटकियां संतुलित करते हुए किए गए नृत्य ने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा। कलाकारों ने कठिन संतुलन और नृत्य कौशल का प्रदर्शन करते हुए अपनी कला की बारीकियां प्रस्तुत कीं।

GNSU Admission Open 2026

इसके अलावा मटकी नृत्य, अग्नि नृत्य और घुटना चकरी जैसी पारंपरिक लोक नृत्य शैलियों ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। अग्नि नृत्य के दौरान दहकती ज्वालाओं के बीच कलाकारों की प्रस्तुति ने सभागार में रोमांच का माहौल बना दिया। वहीं, घुटनों के बल चक्कर लगाते हुए किए गए नृत्य ने कलाकारों की शारीरिक क्षमता और अभ्यास को दर्शाया।

लोकगीतों और धार्मिक भजनों पर आधारित प्रस्तुतियों के बीच कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति चिरमी लोकगीत पर हुई, जिसे दर्शकों की ओर से विशेष सराहना मिली। इस प्रस्तुति के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक अपनी सीटों से उठकर कलाकारों के साथ झूमने लगे। राष्ट्रीय कला मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद सहित कई कला प्रेमी भी मंच पर पहुंचे और कलाकारों के साथ नृत्य किया। पूरा सभागार तालियों और जयकारों से गूंज उठा।

मुख्य अतिथि महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष कमलकांत कोचर ने कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय कला मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद ने बताया कि गजल सम्राट और पद्मविभूषण दिवंगत जगजीत सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर 11 अक्टूबर को संस्था की ओर से स्वरांजलि के रूप में विशेष संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।