Mehbooba Mufti's statement on Eid: Prayers for Palestine, Lebanon, Iran, and silence on attacks

जम्मू-कश्मीर: जम्मू और कश्मीर में ईद-उल-फितर के मौके पर जहां एक ओर धार्मिक उल्लास और पारंपरिक उत्साह देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर सियासी बयानबाज़ी ने माहौल को गरमा दिया। महबूबा मुफ्ती के बयान ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया, जिसमें उन्होंने फिलिस्तीन, लेबनान और ईरान के लोगों के लिए दुआ की। उनके इस रुख को लेकर विरोधी दलों ने सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उन्होंने अन्य क्षेत्रों में प्रभावित लोगों की अनदेखी की है।

इस बीच श्रीनगर में ईद की नमाज़ को लेकर भी विवाद सामने आया। ऐतिहासिक जामा मस्जिद में नमाज़ की अनुमति नहीं दी गई, जिसके चलते इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की।

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दूसरी ओर, हजरतबल दरगाह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे, जहां हजारों लोगों ने एक साथ नमाज़ अदा की और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। यह इस वर्ष कश्मीर में ईद की सबसे बड़ी सामूहिक नमाज़ों में से एक रही।

ईद के अवसर पर धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। मीरवाइज उमर फारूक ने सोशल मीडिया के माध्यम से जामा मस्जिद में लगातार पाबंदियों पर नाराज़गी जताई और इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। वहीं उमर अब्दुल्ला ने भी इस फैसले पर अफसोस व्यक्त किया।

कुल मिलाकर, जहां एक तरफ ईद का त्योहार भाईचारे और खुशी का संदेश लेकर आया, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाज़ी और प्रशासनिक फैसलों ने इस मौके को बहस और विवाद का केंद्र भी बना दिया।