लुधियाना: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किए जाने के फैसले के बाद लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्र ने इसके वित्तीय प्रभाव पर चिंता जताई है। वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के अध्यक्ष बादिश जिंदल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर फैसले की समीक्षा की मांग की है।
जिंदल के अनुसार, वेतन सीमा 15,000 रुपये रहने पर नियोक्ता का EPF योगदान करीब 1,800 रुपये प्रति कर्मचारी प्रतिमाह होता है, जबकि 25,000 रुपये की सीमा पर यह राशि बढ़कर 3,000 रुपये हो सकती है। इससे प्रति कर्मचारी करीब 1,200 रुपये प्रतिमाह या 14,400 रुपये सालाना अतिरिक्त भार पड़ने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि 100 कर्मचारियों वाली इकाई पर यह अतिरिक्त वार्षिक खर्च करीब 14.40 लाख रुपये और 500 कर्मचारियों वाली इकाई पर करीब 72 लाख रुपये तक हो सकता है। उद्योग का कहना है कि इसका असर विशेष रूप से एमएसएमई और श्रम-प्रधान विनिर्माण इकाइयों पर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ने से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं। यह बदलाव 17 सितंबर से प्रभावी हुआ है और इसका उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जोड़ना है।
उद्योग ने सुझाव दिया है कि 15,000 से 25,000 रुपये के अतिरिक्त वेतन हिस्से पर नियोक्ता का योगदान कम रखा जाए, योगदान को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए या सरकार की ओर से कुछ सहायता दी जाए। साथ ही EPF, ESI और अन्य वैधानिक रोजगार लागतों के संयुक्त प्रभाव का आकलन करने की मांग की गई है।







