स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जा रहा निरंतर प्रयासः मंगल पांडेय

पटना। बिहार के स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर करने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर के अस्पतालों को दुरुस्त किया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर रही है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इस दिशा में मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 (2025 -2030) के विजन के तहत प्रथम चरण में राज्य के 11 जिला अस्पतालों और 180 प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रसूति शल्य कक्षों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित कर क्रियाशील किया जाएगा।

श्री पांडेय ने बताया कि प्रथम चरण में 11 जिला अस्पतालों का चयन किया गया है, जिसमें बेगूसराय, भोजपुर, पूर्वी चंपारण, सीवान, सीतामढ़ी, वैशाली, अररिया, बांका, मुजफ्फरपुर, नालंदा और सहरसा शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य के सभी जिलों के कुल 180 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी चिन्हित किया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को उनके घर के पास ही विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) के अनुरूप 36 प्रकार के आधुनिक और हाई-टेक चिकित्सीय उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध में सभी सिविल सर्जनों को चिन्हित केंदो का निरीक्षण कर आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और कमी का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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श्री पांडेय ने कहा कि इन केंद्रों को विशिष्ट बनाने के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन केंद्रों पर एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन और डिफिब्रिलेटर की उपलब्धता अनिवार्य रूप से की जाएगी, ताकि आपातकालीन स्थिति का बेहतर प्रबंधन हो सके। इस पहल से न केवल बड़े अस्पतालों पर भार कम होगा, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में एक ऐतिहासिक और दीर्घकालिक सुधार भी देखने को मिलेगा।