तेहरान: ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान की सात शर्तों में से कुछ को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, उन्होंने अमेरिकी प्रतिक्रिया को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि तेहरान अब अपनी कूटनीतिक नीति में पहले जैसी स्थिति में लौटने को तैयार नहीं है।
रेजाई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान की सभी शर्तों को स्वीकार नहीं किया है। उनके अनुसार, मौजूदा जवाब ईरान की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान की कूटनीतिक रणनीति में बदलाव आ चुका है और आगे की बातचीत इसी बदली हुई स्थिति के आधार पर होगी।
हालांकि, रेजाई ने अपने बयान में उन सात शर्तों का विस्तृत विवरण नहीं दिया, जिनका उन्होंने उल्लेख किया। अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी इन दावों की पुष्टि या शर्तों को स्वीकार किए जाने के संबंध में कोई प्रतिक्रिया इस जानकारी में शामिल नहीं है।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर निशाना
रेजाई ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस संघर्ष को अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी रणनीतिक गलतियों में से एक बताते हुए वाशिंगटन के फैसलों पर सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के अपने उद्देश्य में सफल नहीं रहा। रेजाई ने अमेरिकी सेना की कार्रवाई को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान पहले कभी इस तरह की स्थिति में नहीं पहुंचा।
हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और अमेरिकी सैन्य अभियान की सफलता को लेकर रेजाई के दावे की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। उनका बयान ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के संदर्भ में आया है।
कूटनीतिक समाधान पर नजर
ईरान और अमेरिका के बीच संबंध लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं। सैन्य टकराव और कूटनीतिक बातचीत के बीच दोनों देशों के रुख पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
रेजाई के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान अपनी मांगों पर समझौते को लेकर सतर्क रुख अपना रहा है। अब आगे







