बेलफास्ट: भारतीय टी-20 टीम के सहायक कोच रयान टेन डेशकाटे का मानना है कि हमारे खिलाड़ी आयरलैंड की परिस्थितयों के अनुसार ढलने में नाकाम रहने के कारण टीम को हार का सामना करना पड़ रहा है। आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में 2-0 की हार के बाद डेशकाटे ने कहा, “हम सभी थोड़े हैरान हैं। लेकिन उन खिलाड़ियों की बहुत आलोचना करना भी मुश्किल है जिन्होंने अभी-अभी विश्व कप जीता है। हमें ऐसी टीम ने मात दी जिसने बुनियादी चीजें हमसे बेहतर तरीके से कीं। सबसे पहले आयरलैंड को श्रेय देना होगा। हमारे लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि अलग परिस्थितियों में स्वयं को जल्दी ढालना सीखना होगा। खिलाड़ी भारत में खेलने का तरीका अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन यह सीरीज़ याद दिलाती है कि दूसरे देशों और अलग टीमों के खिलाफ हमें अलग तरह से खेलना सीखना पड़ेगा।
टेन डेशकाटे के अनुसार भारतीय टीम को उन परिस्थितियों ने सबसे अधिक परेशान किया जिनकी उसे आदत नहीं थी।
उन्होंने कहा, “यही हमारी हार की सबसे बड़ी वजह रही। हमने मैच से पहले इस बारे में बात की थी, लेकिन मैदान पर हम उसे सही तरह से लागू नहीं कर सके। सबसे बड़ा फ़ैक्टर हवा थी। यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन जब आपके सामने अलग चुनौती आती है तो आपको नए समाधान ढूंढ़ने पड़ते हैं। आयरलैंड ने गेंद से यह काम शानदार ढंग से किया। उन्होंने हमें सीधे बल्ले से खेलने नहीं दिया। दो मैचों में हमने केवल दो सीधे छक्के लगाए और दोनों स्पिनरों के खिलाफ आए। उन्होंने बुनियादी चीजें बेहतरीन ढंग से कीं और हम उसका जवाब नहीं दे पाए।”
उन्होंने कहा कि भारतीय बल्लेबाज हाल के वर्षों में ऐसे टेम्पो और शैली के आदी हो गए हैं जिसमें छक्के लगाना अपेक्षाकृत आसान होता है।
उन्होंने कहा, “इंग्लैंड में भी हमें ऐसी ही चुनौती मिल सकती है। विकेट थोड़े तेज होंगे, हवा शायद कम होगी, लेकिन अगर हमें वहां जीतना है तो और समझदारी से खेलना होगा।”
दोनों मैचों में आयरलैंड ने ‘वी’ क्षेत्र में भारत से क्रमशः 23 और 33 रन अधिक बनाए। दूसरे मैच में भारतीय गेंदबाजो ने कुछ हद तक सुधार किया, लेकिन आयरलैंड के गेंदबाज और बेहतर साबित हुए।
टेन डेशकाटे ने कहा, “दूसरे मैच से पहले हमारी चर्चा का मुख्य विषय यही था कि बल्लेबाजो को सीधे खेलने से कैसे रोका जाए। मुझे लगा कि हमारे गेंदबाजो ने इस मामले में बेहतर काम किया। लेकिन आयरलैंड की गेंदबाजी फिर भी शानदार रही।
मुझे नहीं लगता कि उनके तेज गेंदबाजो ने एक भी गेंद फुल लेंथ पर डाली हो। उनके स्पिनरों ने भी यही रणनीति अपनाई और उनके इकॉनमी रेट में यह साफ दिखा। हमें इससे सीखना होगा और परिस्थितियों के अनुसार खु़द को जल्दी ढालना होगा।”
उन्होने कहा, “पिछले दो-तीन सालों से हमारी पहचान पावरप्ले में दबदबा बनाने की रही है। अगर आप शॉट खेलने की कोशिश ही नहीं करेंगे तो छक्का कैसे लगेगा। हमें संतुलन बनाना होगा। मैं यह नहीं कहूंगा कि अब हमें शुरुआत में बहुत सतर्क होकर खेलना चाहिए। यह हमारी शैली नहीं है। हमें केवल बेहतर विकल्प चुनने हैं और पावरप्ले पर नियंत्रण बनाने के लिए खुद को बेहतर स्थिति में रखना है। ज्यादा अभ्यास आपको परिस्थितियों के अनुसार ढलने में मदद करता है। लेकिन खिलाड़ियों को तरोताज़ा रखना भी उतना ही ज़रूरी है। पीछे मुड़कर देखने पर भी मैं अपनी तैयारियों में कोई बदलाव नहीं करता।
हम गुरुवार को यहां पहुंचे थे। आयरलैंड बेहतर सुविधाएं देने की पूरी कोशिश कर रहा था, लेकिन अभ्यास की परिस्थितियां आदर्श नहीं थीं। सामान्य दौरे की तरह अगर तीन-चार अभ्यास सत्र मिलते तो बेहतर होता। फिर भी यह कोई बहाना नहीं है। अगर हमें स्वयं की आलोचना करनी है तो यही कहेंगे कि अलग चुनौती मिलने पर हमें खु़द को और जल्दी ढालना होगा।
उन्होंने कहा, “अगर पूरी ईमानदारी से कहूं तो मैंने ऐसी चुनौती की उम्मीद नहीं की थी। भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां देखिए। कुछ खिलाड़ी लगातार दो विश्व कप जीत चुके हैं और कई खिलाड़ी सैकड़ों आईपीएल मैच खेल चुके हैं। ऐसे में आयरलैंड की उपलब्धि और भी बड़ी हो जाती है। मैं यह भी नहीं कहूंगा कि हमने दो खराब मैच खेले। आयरलैंड दोनों दिनों शानदार रहा। उन्होंने 240-250 रन वाली चमक-दमक वाली क्रिकेट नहीं खेली, बल्कि समझदारी से अच्छे स्कोर बनाए। हमने दोनों टॉस भी जीते थे। हारना बेहद निराशाजनक है, लेकिन आयरलैंड को इस तरह प्रगति करते देखना भी सुखद है। उन्होंने अपनी सीमित संसाधनों का पूरा इस्तेमाल किया और जीत हासिल की। इसके लिए हम उन्हें सलाम करते हैं।”







