
तेहरान: ईरान ने ब्रिटेन ने चेतावनी दी है कि अगर उसने हमलों के लिए अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की इजाजत दी तो उसे ‘नतीजे भुगतने होंगे’। ईरान ने गुरुवार को ब्रिटेन के उस कथित फ़ैसले की निंदा की जिसमें उसने अमेरिका को उसके ख़िलाफ़ हमलों के लिए सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी थी। ईरान ने चेतावनी दी कि जो भी देश उसके ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई में मदद करेगा, उसे “नतीजे भुगतने होंगे।”
यह चेतावनी एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने ईरान के ख़िलाफ़ अभियान में मदद के लिए अमेरिका को सैन्य सुविधाओं में हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया और इंग्लैंड में आरएएफ फेयरफोर्ड के इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है।
एक बयान में ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के “ग़ैर-क़ानूनी” हमलों के लिए सैन्य अड्डों और रसद सहायता देने का लंदन का फ़ैसला संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है। मंत्रालय ने कहा, “ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की ग़ैर-क़ानूनी सैन्य आक्रामकता का समर्थन करने के लिए अपने सैन्य अड्ढों और सुविधाओं को उपलब्ध कराने का ब्रिटिश सरकार का फ़ैसला अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और नियमों का उल्लंघन है।”
मंत्रालय ने तर्क दिया कि ब्रिटेन का यह कदम संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के अनुच्छेद 3(एफ) के तहत “आक्रामकता का कृत्य” है, जो आक्रामकता को इस तरह परिभाषित करता है कि कोई देश अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश को किसी तीसरे देश पर हमले करने के लिए करने दे। मंत्रालय ने कहा कि ब्रिटिश सरकार को अच्छी तरह पता था कि इज़रायल की भागीदारी के साथ शुरू किया गया ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी सैन्य अभियान “आक्रामकता का खुला कृत्य” था और ऐसे ऑपरेशन की तैयारी या संचालन में कोई भी मदद “आक्रामकता और युद्ध अपराधों के अपराध में मिलीभगत” है।
मंत्रालय ने हमलों की निंदा करने के बजाय हमलावर देशों का समर्थन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य ब्रिटेन की भी आलोचना की। बयान में कहा गया, “ग़ैर-क़ानूनी सैन्य आक्रामकता की निंदा करने के बजाय, ब्रिटेन ने हमलावरों का समर्थन करने का फ़ैसला किया है; यह फ़ैसला क़ानून के शासन, मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति उसकी घोषित प्रतिबद्धता के अनुरूप नहीं है।” ईरान ने उसके प्रति ब्रिटेन के लंबे समय से चले आ रहे दुश्मनी भरे रवैये का भी आरोप लगाया। इसमें 1953 के तख्तापलट, 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान इराक को समर्थन, परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध, संयुक्त राष्ट्र के “स्नैपबैक” मैकेनिज्म को शुरू करने की कोशिशों का समर्थन और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को नामित करने जैसी बातें शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा, “ईरान विदेशी हमले के खिलाफ अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। जो भी पक्ष किसी भी तरह से ईरान के खिलाफ सैन्य हमले में शामिल होगा, उसे अपने फैसले के नतीजों की जिम्मेदारी लेनी होगी।” बुधवार को मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि श्री बर्नहम ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ ऑपरेशन के लिए डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा और आरएएफ फेयरफोर्ड का इस्तेमाल जारी रखने की मंजूरी दे दी है।






