तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के शनिवार को ओमान की यात्रा पर जाने की संभावना है, जहां वह होर्मुज जलडमरूमध्य तथा व्यापक क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा करेंगे। सीएनएन की एक रिपोर्ट में मामले से परिचित एक सूत्रों के हवाले से कहा गया कि श्री अराघची एक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल के साथ ओमान जाएंगे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने भी उनकी प्रस्तावित यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया कि वार्ता का मुख्य विषय होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति होगा। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब विभिन्न पक्ष ठप पड़ चुकी कूटनीतिक प्रक्रिया को फिर से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बार फिर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अब समाप्त हो चुका है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ वार्ता जारी रहेगी।
दूसरी ओर, विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका पर तेहरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित समझौता ज्ञापन के एक प्रावधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने शनिवार तड़के सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “ ईरान ने अब तक अपने वचन का पालन किया है, जबकि अमेरिकी वित्त मंत्री समझौता ज्ञापन के पैरा-9 का उल्लंघन कर रहे हैं।” समझौता ज्ञापन के नौवें प्रावधान के अनुसार अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति बनाये रखेगा, जबकि अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात नहीं करेगा। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने भी कहा कि यदि अमेरिका समझौता ज्ञापन का उल्लंघन करता है तो तेहरान ‘पूर्ण रक्षा’ के लिए तैयार है। उन्होंने शुक्रवार को कहा, “ हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है। वार्ता के दौरान मैंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति से स्पष्ट कहा था कि हमें आप पर कोई विश्वास नहीं है।”
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य युद्धविराम प्रयासों में प्रमुख बाधा बनकर उभरा है। ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के कुछ हिस्सों पर अपना नियंत्रण जताता रहा है और इस सप्ताह की शुरुआत में वहां से गुजर रहे जहाजों पर गोलीबारी भी की थी। इसके जवाब में अमेरिका ने कई दिनों तक ईरानी ठिकानों पर सैन्य हमले किये।अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित नहीं कर सकता, लेकिन समझौता ज्ञापन में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसके बजाय इसमें केवल इतना कहा गया है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए आवश्यक व्यवस्था करेगा और जलमार्ग के भविष्य के प्रशासन को लेकर ओमान के साथ विचार-विमर्श करेगा।







