India's first private rocket 'Vikram-1' successfully launches after a brief delay

श्रीहरिकोटा: तकनीकी खामी के कारण लगभग 35 मिनट की देरी के बाद देश के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल श्रेणी के रॉकेट ‘विक्रम-1’ का शनिवार को यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (शार) से सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने प्रक्षेपण के तुरंत बाद कहा, “लिफ्ट ऑफ सामान्य रहा।”
करीब 36 घंटे की निर्बाध उलटी गिनती पूरी होने के बाद 22 मीटर ऊंचे और 40 टन वजनी रॉकेट का प्रक्षेपण निर्धारित था लेकिन स्वचालित प्रक्षेपण अनुक्रम शुरू होने के बाद तकनीकी खामी का पता चलने पर इसे कुछ देर के लिए रोक दिया गया।


खामी दूर होने के बाद सभी प्रणालियों की अंतिम जांच के लिए 20 मिनट की नयी उलटी गिनती शुरू की गयी, जिसके बाद रॉकेट ने दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर बादलों से घिरे आसमान के बीच पहले प्रक्षेपण ने परिसर से उड़ान भरी।

GNSU Admission Open 2026

KATHA CONCERT KOLKATA


रॉकेट के लगभग 14 मिनट की उड़ान के बाद 60 डिग्री के झुकाव के साथ पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचने की उम्मीद है।
मिशन नियंत्रण केंद्र में इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन तथा विक्रम-1 का निर्माण करने वाली निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के वैज्ञानिक मिशन की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विक्रम-1 मिशन को भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन देश के युवाओं की प्रतिभा, संकल्प और उद्यमशीलता की भावना को प्रदर्शित करता है तथा यह भी दर्शाता है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधार नवाचार और उद्यम के लिए नये अवसर खोल रहे हैं।
मिशन के प्रतीकात्मक पेलोड में प्रधानमंत्री के हस्तलिखित संदेश वाला एक पोस्टकार्ड भी शामिल है, जिस पर “वंदे मातरम्” लिखा हुआ है।